अनुनय के प्रति प्रतिरोध - resistance to persuasion
अनुनय के प्रति प्रतिरोध - resistance to persuasion
जैसा पिछले वर्णन और व्याख्या में बताया गया है कि मनोवृत्ति परिवर्तन होना. कई कारकों पर निर्भर करता है। मनोवृत्ति अपेक्षाकृत स्थायी होती है। इसमें परिवर्तन भी होता है। यह कई बातों पर निर्भर करता हैं कि मनोवृत्ति में परिवर्तन कब, कैसे और कितना होता है। मनोवृत्ति परिवर्तन सरल भी हो सकता है अर्थात सरलता से मनोवृत्ति में परिवर्तन हो सकता हैं। तथा यह परिवर्तन कठिन भी हो सकता है। ऐसे भी बहुत से कारक हैं जो मनोवृत्ति परिवर्तन का प्रतिरोध करते हैं जिससे मनोवृत्ति में परिवर्तन कठिन होता है। यहाँ पर हम ऐसे ही कुछ कारकों पर प्रकाष डाल रहे हैं।
1. पूर्व चेतावनी अथवा अनुनय के मंतव्य की पूर्व जानकारी: जब व्यक्ति को इस बात की जानकारी पहले से ही हो कि उसकी मनोवृत्ति में परिवर्तन किया जाना है तब किये गये अनुनयात्मक संचार से मनोवृत्ति में परिवर्तन कठिन हो जाता है। जब व्यक्ति को पूर्व में ही इस प्रकार की सूचना किसी भी माध्यम से प्राप्त हो जाती है कि उसके विचारों या मनोवृत्ति में अमुक परिवर्तन करना है
तो व्यक्ति इसके लिये पहले से ही तैयार हो जाता है और किये जा रहे अनुनयात्मक संचार से वह प्रभावित नहीं होता। यह देखा गया है कि यदि पहले से सूचना या पूर्व चेतावनी नहीं दी जाती है तो मनोवृत्ति परिवर्तन सरल होता से है। जब व्यक्ति यह जानता है कि यह भाषण या लिखित अपील उसके दृष्टिकोण को बदलने के उद्देष्य से संरचित किया गया है तो वह बहुत कम प्रभावित होता है, उसकी तुलना में जिसको इस प्रकार की पूर्व जानकारी नहीं होती है। पूर्व चेतावनी हमको अनुनयात्मक संचार अथवा संदेष विरोध में तर्क बनाने का अवसर प्रदान करती है। यह ऐसे तर्क होते हैं जो उस संदेष को नकारते है। और इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं। ये पूर्व चेतावनी या जानकारी हमें उन सूचनाओं को याद करने का भी समय और अवसर देती है जो नये संदेष के प्रभाव को रोकती है।
2. अनुनयन का चयनात्मक परिहारः अनुनय या मनोवृत्ति परिवर्तन के प्रतिरोध का एक ढंग चयनात्मक परिहार भी है जिसमें व्यक्ति दिये जा रहे संदेष अथवा सूचना से अपना ध्यान हटा लेता है.
जो संदेष उसकी वर्तमान मनोवृत्ति को चुनौती देते हैं। आप ने देखा होगा कि जब कोई हमारे विचार के अनुकूल विचार या सूचना प्रस्तुत नहीं करता तो हम उससे अपना ध्यान हटा लेते हैं जैसे, जब कोई सूचना हमारी मनोवृत्ति के संगत नहीं होती तब हम उस सूचना को छोड़कर दूसरी सूचना या अन्य कार्य भर ध्यान देने लगते हैं।
3. प्रतिघातः व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को सामान्यता स्वीकार नहीं करते। वे अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मिलने वाली चुनौती के प्रति नकारात्मक प्रतिक्रिया करते हैं। प्रतिघात अधिकतर, मनोवृत्ति परिवर्तन के उद्देष्य से लिये गये संचार के प्रति प्रतिरोध उत्पन्न करता है।
प्रतिघात से नकारात्मक या उल्टी दिषा में मनोवृत्ति परिवर्तन हो जाता है (बेम, 1966 ) । व्यक्ति को मनोवृत्ति परिवर्तन के उद्देष्य से जब कोई संदेष या सूचना दी जाती है तो व्यक्ति को उस सूचना पर भरोसा कम हो जाता है। कुछ मनोवैज्ञानिकों (बेम. 1966) एवं (पज्यूगन तथा डेविसन, 2004) ने बताया कि प्रतिघात से उल्टी या विपरीत मनोवृत्ति बन जाती है।
4. प्रतितर्क: यदि सूचना उसे संगत नहीं लगती तो व्यक्ति उसे नकारता है और इस ढंग से वो अनुनय का प्रतिरोध करता है। लेकिन कई साक्ष्य इस बात को स्पष्ट करते हैं कि व्यक्ति इस निष्क्रीय ढंग के अलावा भी कुछ तरीके अपनाता है- वह उसके प्रति प्रतितर्क करता है। वह सूचना या संदेष के विरोध में तर्क करता है और उस अनुनय का प्रभाव अपने ऊपर पढ़ने से रोकता है। हम अधिक सक्रिय रणनीति बनाते हैं अर्थात हम उन विचारों या दृष्टिकोणों, जो हमारे विचार या दृष्टिकोण के विरोधी होते हैं के प्रति प्रतितर्क प्रस्तुत करते हैं। (ईग्ली, चेन, चाइकेन एवं शा-बार्नर्स, 1999)
वार्तालाप में शामिल हों