आलोचनाओं के समाधान - resolving criticisms
आलोचनाओं के समाधान - resolving criticisms
प्रकार्यवाद ऐतिहासिक अध्ययन पर बल नहीं देता है. इसका अभिप्राय यह नहीं है कि वह इस दिशा में ध्यान नहीं दतस है। जहाँ आवश्यक होता है, वह उस दृष्टि से देखने का प्रयत्न करता है। कोई भी पद्धति स्वयं में पूर्ण नहीं है।
प्रकार्यवाद परिणामों के अध्ययन पर अधिक बल देता है। कारणों का अध्ययन अन्य पद्धतियों से किया जाना चाहिए। दुर्खीम ने स्वयं कारक पद्धतियों (causal methods) पर भी बल दिया है। यह आलोचना निराधार है।
संतुलन को पूर्व निश्चित मानना, पद्धतिशास्त्रीय दोष, प्रकार्यवाद में प्रयुक्त होने वाले प्रत्ययों का अस्पष्ट होना. केवल संरचना और प्रकार्यों का अध्ययन आदि पुराने प्रकार्यवाद की आलोचना हो सकती है. पर आधुनिक प्रकार्यवाद बहुत आगे बढ़ गया है और उसने इन कमियों एवं दोषों को स्वयं ही दूर कर लिया है।
प्रकार्यवाद को रूढ़िवादी विचारणारा या प्रगतिवादी विचारणारा मानना उचित नहीं है। मर्टन ने इन सबका खंडन किया है। प्रकार्यवाद ने स्वयं प्रचलित लिखा है- "एक बार यदि यह (प्रकार्यवाद) इस मान्यता को अपना लेता है कि समस्त प्रचलित सामाजिक संरचनाएँ मुख्य प्रकार्यात्मक विश्लेषण निरर्थकता के रूप में गिर गया होता। ये मान्यताएँ तो इतिहास की बातें हो गई है।
मर्टन का कहना है कि प्रकार्यवाद तो एक तटस्थ (neutral) विचार, सिद्धांत और पद्धति है। यह न तो रूढ़िवादी है और न ही प्रगतिवादी। वह लिखता है- “एक तो अध्ययन की एक पद्धति (method of study) है जो न रूढ़िवादिता का समर्थन करती है न ही उसे प्रगतिवाद से कोई आकर्षण है। सामान्यतः प्रत्येक समाज विज्ञान और समाजदर्शन की सैद्धांतिक मान्यताओं को विभिन्न विचारधाराओं से संबद्ध करने को प्रवृत्ति प्रकार्यत्मक विश्लेषण की भी रूढ़िवादी या प्रगतिवादी विचारधारा मानने के लिए उत्तरदाई है।" आगे अपने विचार को और भी अधिक स्पष्ट करते हुए उसने लिखा है - “और ये मूल्यांकन है जो प्रकार्यवाद की बोतलों में विचारधारात्मक अंतर्वस्तु भरने की आज्ञा देते हैं। बोतले स्वयं अपनी अंतर्वस्तुओं के प्रति तटस्थ है और वे समान रूप से विचारधारात्मक विष या विचारधारात्मक अमृत के पात्रों के रूप में काम दे सकती हैं।"
मर्टन ने इस आलोचना का उत्तर देते हुए कहा है- "यह तथ्य कि कुछ लोगों की प्रकार्यात्मक विश्लेषण प्रकृति से दोनों में से कोई नहीं हो सकता।"
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