निषेध के निषेध का नियम - rule of prohibition of prohibition
निषेध के निषेध का नियम - rule of prohibition of prohibition
हीगल की मान्यता थी कि निषेध की अवधारणा विचार तथा चिंतन में उपजती है। मार्क्स ने हींगल की आलोचना की तथा निषेध की भौतिकवादी व्याख्या दी और बताया कि निषेध यथार्थ के विकास का एक अभिन्न अंग है। किसी भी क्षेत्र में कोई भी तत्व अपने पूर्व के अस्तित्व के स्वरूप को नकारे बिना विकसित नहीं हो सकता है। इस प्रकार समाज का इतिहास भी प्राचीन सामाजिक व्यवस्था में नई व्यवस्था द्वारा निषेधों की एक श्रृंखला है। पूँजीवाद सामंतवादी समाज का निषेध है तथा विज्ञान के क्षेत्र में भी प्रत्येक नया वैज्ञानिक सिद्धांत प्राचीन सिद्धांतों का निषेध करता है। इस नियम का मूल द्वंद्व है। जब तक पुरानी पद्धति से नई पद्धति संघर्ष नहीं करती, विकास नहीं हो सकता। निषेध किसी वस्तु अथवा प्रघटना में बाहर से प्रविष्ट नहीं करता है, अपितु यह किसी वस्तु अथवा प्रघटना के आंतरिक विकास का ही परिणाम होता हैं वस्तुएँ अथवा प्रघटनाएँ स्वयं में निहित आंतरिक विरोधाभासों के आधार पर विकसित होती हैं वे अपने ही विनाश की दशाएँ उत्पन्न करती हैं इस प्रकार, समाजवाद पूँजीवाद का स्थान इसलिए लेता है, क्योंकि यह पूँजीवाद व्यवस्था के आंतरिक विरोधाभासों का समाधान करता है।
नई अवस्था कभी भी पुरानी अवस्था को पूरी तरह से नहीं बदलती है। यह पुरानी अवस्था में से कुछ विशिष्ट तत्वों अथवा पक्षों को अपने में समेट लेती है और यह क्रिया भी इसमें यांत्रिक रूप से घटित नहीं होती, अपितु अपनी स्वयं की प्रकृति के अनुरूप नई अवस्था प्राचीन तत्वों को अपने आप में आत्मसात तथा परिवर्तित करती है।
इन्हीं कारणों से विकास की अवस्थाओं में क्रमिक परिवर्तन होता है। यद्यपि कोई भी अवस्था पूर्ण रूप से पुनर्घटित नहीं होती, फिर भी पिछली अवस्थाओं की कुछ विशेषताएँ, बाद की अवस्थाओं में रूपांतरित स्वरूप से आ जाती हैं इस प्रकार प्राचीन अवस्था का पतन हो जाता है और नई अवस्था का उदय होता है। यह विकास की एक अवस्था मात्र है। अंतिम स्थिति नहीं, क्योंकि विकास कभी नहीं रुकता। कोई भी नई अवस्था सदैव नई और स्थाई नहीं रहती। विकास की प्रक्रिया में और अधिक प्रगतिशील अवस्था के लिए दशाएँ बनने लगी हैं और जब ये नई दशाएँ परिपक्व हो जाती हैं तो एक बार पुनः निषेध घटित होता है और इसी को निषेध कहते हैं। इसमें पहले निषेध के बाद वाला निषेध उच्चतर स्थिति का होता है यह प्रक्रिया अनवरत रूप से चलती रहती है।
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