नियमहीनता और विचलित व्यवहार ,नियमहीनता और आत्महत्या - Rulelessness and deviant behavior Rulelessness and suicide
नियमहीनता और विचलित व्यवहार ,नियमहीनता और आत्महत्या - Rulelessness and deviant behavior Rulelessness and suicide
नियमहीनता एक दशा या स्थिति है और विचलित व्यवहार उस दशा या स्थिति (नियमहीनता) की व्यवहार में अभिव्यक्ति है। नियमहीनता का परिणाम विचलित व्यवहार है। नियमहीनता ही विचलित व्यवहार की प्रेरणा है। नियमहीनता और विचलित व्यवहार एक-दूसरे से अत्यधिक संबंधित है। जब सामाजिक संरचना में नियमहीनता पनपती है. तभी व्यक्ति विचलित व्यवहार करते हैं। नियमहीनता और विचलित व्यवहार एक ही प्रक्रिया के दो अंग है नियमहीनता आतंरिक है और विचलित व्यवहार वैषयिक है।
नियमहीनता और आत्महत्या:
आत्महत्या वैयक्तिक विघटन की अंतिम परिणाम या स्थिति है, जब व्यक्ति अपनी हत्या करता है। आत्महत्या को प्रायः एक व्यक्तिगत घटना माना जाता था. जो कि व्यक्ति की निजी बात है। पर दुख ने आत्महत्या को एक सामाजिक घटना माना है और उसके कारणों को भी सामाजिक ही दर्शाया है। आत्महत्या उस स्थिति में होती है जब व्यक्ति की अलगाव की भावना चरम बिंदु पर पहुँच जाती है। व्यक्ति न केवल समाज या अन्य व्यक्तियों से पितु अपने स्वयं से भी अलगाव अनुभव करने लगता है।
आत्महत्या उस स्थिति में व्यक्ति करता है जब उसे जीवन सारहीन लगता है। नियमहीनता के अर्थ पर हम प्रारंभ में ही प्रकाश डाल चुके हैं। नियमहीनता ही व्यक्तियों में समाज से अलगाव की स्थिति को उत्पन्न करती है जिसके कारण व्यक्ति आत्महत्या करता है। नियमहीनता ही अंततः आत्महत्या के लिए उत्तरदाई है। प्रायः देखा गया है कि जिन समाजों में सामाजिक एकता अधिक पाई जाती है उन समाजों में आत्महत्याएँ कम होती हैं और जिन समाजों में नियमहीनता अधिक पाई है उनमें आत्महत्याएँ अधिक होती हैं। औद्योगिक समाजों में आत्महत्याएँ अधिक होती हैं, कृषि समाजों में आत्महत्याएँ कम होती हैं। प्रायः परंपरात्मक समाजों में सामाजिक एकता अधिक पाई जाती है इसलिए आत्महत्याएँ कम होती है। आधुनिक अप्रतिबंधित समाजों में आत्महत्याएँ अधिक होती हैं, क्योंकि इनमें नियमहीनता अधिक पाई जाती है। दुर्खीम ने अस्वाभाविक या आकस्मिक आत्महत्या को आत्महत्या का एक प्रकार बताया है। यह आत्महत्या तभी होती है जब समाज में आकस्मिक या अस्वाभाविक परिवर्तन इस प्रकार के होते हैं कि व्यक्ति उनके साथ अनुकूलन नहीं कर पाता है। यह ही नियमहीनता (तीव्र नियमहीनता) की स्थिति भी होती है। दुर्खीम के अनुसार अहम्वादी आत्महत्या व्यक्ति तब करता है जबकि वह समाज से अलगाव का अनुभव करता है और व्यक्ति और समाज का सामंजस्य नहीं होता। यह स्थिति भी नियमहीनता का ही परिणाम होती है। उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि नियमहीनता और आत्महत्या में गहरा संबंध है। नियमहीनता ही व्यक्तियों को अधिकांशतः आत्महत्या करने को विवश करती है।
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