अनुसूचित जाति की निर्योग्यताएं - SC Disabilities

अनुसूचित जाति की निर्योग्यताएं - SC Disabilities


अनुसूचित जातियों के बारे में परिचयात्मक विवरण प्रस्तुत करने के पश्चात यहां उनकी निर्योग्यताओं के बारे में चर्चा प्रस्तुत की जाएगी। भारत में अनुसूचित जातियों की अनेक निर्योग्यताएं रही हैं। निर्योग्यता शब्द से आशय किसी वर्ग अथवा समूह को कुछ अधिकारों सुविधाओं आदि को प्राप्त करने की दृष्टि से अयोग्य मान लेने से है। अनुसूचित जातियों के व्यक्तिगत विकास तथा अन्य सामाजिक आर्थिक विकास के मार्ग में ए निर्योग्यताएं बाधक रहती हैं। इन निर्योग्यताओं की वजह से अनुसूचित जातियां अनेक प्रकार के अवसरों व अधिकारों से वंचित रह जाती हैं। इन जातियों को दास जैसे जीवन जीने को मजबूर कर दिया जाता है तथा किसी प्रकार की सुख-सुविधाओं से इन्हें दूर रखा जाता है।


हालांकि वर्तमान समय में ए निर्योग्यताएं अत्यधिक मात्रा में समाप्त कर दी गई है। 20वीं शताब्दी में हुए अनेक सुधार आंदोलनों तथा स्वतरंत भारत में हुए संवैधानिक व सरकारी प्रावधानों की वजह से अनुसूचित जातियों की निर्योग्यताओं तथा वंचितता में काफी मात्रा में कमी आई है। बहरहाल स्मृतियों, धर्मग्रंथों आदि में बताई गई अस्पृश्य जातियों की प्रमुख निर्योग्यताएं अग्रलिखित हैं – 


1. अस्पृश्यों की धार्मिक निर्योग्यताएं


अस्पृश्यों की धार्मिक निर्योग्यताओं को हम निम्न बिंदुओं में स्पष्ट कर सकते हैं-


• जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि अस्पृश्य जातियों को अपवित्र माना जाता है तथा इस वजह से इनको ईश्वर की भक्ति की स्वीकृति नहीं है। अस्पृश्य लोग मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते. पवित्र नदी-घाटों आदि का उपयोग करना वर्जित है. इसके अलावा पवित्र स्थानों पर जाने तथा देवी-देवताओं की पूजा करने के अधिकार नहीं दिए गए। साथ ही अस्पृश्यों को वेद, पुराण आदि के अध्ययन की आज्ञा भी नहीं दी गयी।


• इन्हें सभी प्रकार के धार्मिक कार्यों व सुविधाओं से वंचित रखा गया। अस्पृश्यों को पूजा, आराधना, अर्चना, कीर्तन, भजन आदि से प्रकार के धार्मिक अधिकारों से विमुक्त रखा गया। इसके अलावा उनके यहां ब्राह्मण भी पूजा-पाठ नहीं कर सकते, उन्हें भी अस्पृश्यों के यहां श्राद्ध यज्ञ आदि करने की अनुमति नहीं प्रदान की गई।


• अस्पृश्यों की अपवित्रता जन्म से ही मानी जाने के कारण इनके शुद्धिकरण हेतु कृत्यों अथवा अनुष्ठान आदि का प्रबंध नहीं किया गया, जिससे कि ए पवित्रता की श्रेणी में आ सकें तथा धार्मिक कार्यकलापों में शामिल हो सकें। हिंदुओं के शुद्धिकरण से संबंधित कुल सोलह संस्कारों की व्यवस्था की गई है तथा उन सभी संस्कारों की पूर्ति हेतु समय भी निर्धारित किए गए हैं। परंतु इन सोलह संस्कारों में से अधिकांशतः संस्कारों को अस्पृश्यों के लिए वर्जित किया गया है।