चयन या क्रम परीक्षण - selection or ranking test
चयन या क्रम परीक्षण - selection or ranking test
प्रक्षेपी परीक्षणों की अन्य विधि चयन या क्रम परीक्षण है। इस प्रकार के परीक्षणों में प्रयोज्य को परीक्षण उद्दीपकों को एक विशिष्ट क्रम में सुव्यवस्थित करना होता है अथवा दिये गये परीक्षण उद्दीपकों में से कुछ उद्दीपकों को अपनी पसंद, इच्छा या अन्य किसी आधार पर चुनना होता है। परीक्षणकर्ता, प्रयोज्य द्वारा चुने गये उद्दीपकों या उन उद्दीपकों को प्रयोज्य द्वारा जिस क्रम में सुव्यवस्थित किया जाता है, के आधार पर उसके व्यक्तित्व के शीलगुणों का मापन करता है।
उद्दीपकों को एक खास क्रम में सुव्यवस्थित करने तथा बहुत सारे उद्दीपकों में से प्रयोज्य द्वारा कुछ उद्दीपकों का चयन करने के कारण ही इस परीक्षण का नाम क्रम या चयन परीक्षण रखा गया है। इस श्रेणी में आने वाले कुछ प्रमुख परीक्षण हैं
A. जोन्डी परीक्षण- इस परीक्षण का निर्माण सन् 1947 में जोन्डी द्वारा किया गया था।
1. इसमें प्रयोज्य को अनेक फोटोग्राफ के छ: समूह एक-एक करके दिखलाये जाते हैं।
II. इन तस्वीरों में से प्रयोज्य को दो ऐसे तस्वीरें चुनने के लिये कहा जाता है, जिनको वह सबसे अधिक पसन्द करता है तथा दो तस्वीरें ऐसी चुननी होती हैं, जिन्हें वह सर्वाधिक नापसंद करता है।
III. प्रयोज्य द्वारा चयनित तस्वीरों के आधार पर परीक्षणकर्ता द्वारा उसके व्यक्तित्व के शीलगुणों का मापन किया जाता है। B. काहन टेस्ट ऑफ सिम्बोल अरेन्जमेन्ट (1955)- पाठकों, जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि इसका निर्माण महान् मनोवैज्ञानिक काहन द्वारा सन् 1955 में किया गया था।
1. इस परीक्षण में प्रयोज्य को 16 प्लास्टिक से बनी हुयी वस्तुऐं दिखायी जाती है। जैसे कि- तारा, पशु, क्रास इत्यादि और इन्हें कई श्रेणियों में छाँटना होता है, जैसे घृणा, प्रेम, अच्छा, बुरा, जीवित मृत इत्यादि।
II. इसके बाद प्रयोज्य से पूछा जाता है कि उसने जिन-जिन 16 वस्तुओं को देखा है। उन • वस्तुओं से वह किस व्यक्ति, वस्तु या घटना को साहचर्चित कर रहा है अथवा वह वस्तु उसे जिसके समान दिखाई दे रही है।
III. प्रयोज्य द्वारा जो अनुक्रिया व्यक्त की जाती है, उस आधार पर उसके व्यक्तित्व का मापन किया जाता है।
C. अभिव्यंजक परीक्षण जैसा कि इस परीक्षण के नाम से ही आपको स्पष्ट हो रहा होगा कि यह एक ऐसा प्रक्षेपी परीक्षण है, जिसमें प्रयोज्य को स्वयं को अभिव्यक्त करने का मौका दिया जाता है। अब प्रश्न यह उठता है कि व्यक्ति स्वयं को इस परीक्षण में किस प्रकार से अभिव्यक्त करता है। अर्थात् अभिव्यक्ति का आधार क्या होता है? इस परीक्षण में प्रयोज्य एक तस्वीर बनाता है। प्रयोज्य द्वारा जिस प्रकार की तस्वीर या चित्र बनाया जाता है. उस आधार पर उसके व्यक्तित्व के शीलगुणों के विषय में अनुमान लगाना संभव हो पाता है। अभिव्यंजक परीक्षणों की श्रेणी में आने वाले कुछ प्रमुख परीक्षण हैं
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