आत्म-अनावरण - self-disclosure

आत्म-अनावरण - self-disclosure


मानसिक तथा शारीरिक नग्नता प्राकृतिक देन है। किंतु मनुष्य प्रकृति प्रदत्त रूप में सामाजिक जीवन व्यतीत करना अनुचित मानता है। इसके विपरीत वह प्रकृति प्रदत्त गुणों को परिष्कृत एवं संस्कारित कर सुसंस्कृत जीवन व्यतीत करना श्रेयस्कर समझता है। प्राचीन काल में भी शरीर के कुछ भागों को ढक कर रखा जाता था। सभ्य समाज में प्रत्येक व्यक्ति घर के बाहर वस्त्र धारण किये रहता है। उसका प्रयत्न होता है कि वह अपने को यथासंभव सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करें। प्रत्येक व्यक्ति के मन में अनेक प्रकार के उचित-अनुचित अथवा नैतिक-अनैतिक विचार उत्पन्न होते रहते हैं। किंतु वह सभी विचारों को अनियंत्रित ढंग से व्यक्त नहीं करता है। कोई भी अपने सभी विचारों, भावनाओं एवं अनुभवों को दूसरों के समक्ष अनियंत्रित ढंग से व्यक्त करने के लिए प्रेरित नहीं होता, बल्कि अनेक बातों को अपने तक ही गोपनीय बनाए रखता है। आत्म-अनावरण का अर्थ है कि दूसरे व्यक्तियों के साथ अंतरंग भावनाओं एवं सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है। डलेगा एवं ग्रजलेक (1979) के अनुसार आत्म-आनावरण आवश्यक होता है. और इससे अनेक उद्देश्य की पूर्ति भी होती है। इसके 5 प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है -


1. आत्म अभिव्यक्ति


अनेक स्थितियों में हमारे सांवेगिक अनुभव, विशेषतः निषेधात्मक अनुभव, दुखद एवं तनावकारी होते हैं। जो हमारे मन को बेचैन कर देते हैं। ऐसे में आवश्यक होता है कि इसे अभिव्यक्त कर बाहर निकाल दिया जाये। उदाहरण कभी-कभी किसी संबंधी या मित्र से अकारण विवाद हो जाता है, और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप हो भी जाते है। ऐसे अनुभव दुखद होते हैं। किसी मित्र के समक्ष ऐसे अनुभवों को व्यक्त कर देने से मन हल्का और स्वस्थ हो जाता है। 


2. आत्म स्पष्टीकरण


जब भी दो लोग एक दूसरे से अपने अंतरंग समस्याओं, भावनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, तो उससे दो प्रकार के लाभ होने की संभावना बढ़ जाती है।

एक-दूसरे की समझ अधिक गहरी होने के साथ-साथ अपने बारे में भी अधिक जानकारी या स्पष्टता में वृद्धि हो सकती है। जब कोई अपने मित्र के समक्ष अपने मानसिक समस्या को बताता है, तो उससे समस्या को समझने में आसानी होती है और दोनों के बीच मित्रता भी बढ़ती है।


3. सामाजिक वैधकरण


जब हम अपने विचारों एवं भावनाओं को दूसरे व्यक्ति के समक्ष व्यक्त करते हैं तो दूसरा व्यक्ति उसके प्रति अपनी प्रतिक्रिया देता है, उस प्रतिक्रिया के आधार पर व्यक्ति सुविधा से निर्धारित कर सकता है कि उसके विचार सामाजिक दृष्टिकोण से उचित है या नहीं। जब कोई व्यक्ति किसी सामाजिक गतिविधि अथवा किसी अन्य के प्रति अपने दृष्टिकोण को किसी से बताता है, तो सुनने वाला उसका समर्थन करता है या उसको अनुचित मानता है। उसके आधार पर व्यक्ति समझ सकता है कि वैसा दृष्टिकोण उचित है या अनुचित। 


4. सामाजिक नियंत्रण


व्यक्ति अपने अंतरक्रिया जगत को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से अपने अंतरंग विचारों एवं अनुभव को छुपाए रखता है या दूसरों को बताता है। कभी- कभी अपने प्राइवेसी के क्षण बनाए रखने के लिए अनेक प्रकार के अनुभवों को हम अपने तक ही सीमित रखते हैं। दूसरी ओर दूसरों की दृष्टि में अपनी छवि को अधिक आकर्षक बनाए रखने के लिए दूसरों के समक्ष अपने विचारों एवं अभिवृत्ति को विस्तृत रूप से व्यक्त करते हैं। कुछ ऐसे भी है जो दूसरों को प्रभावित करने के लिए झूठ-मूठ की सूचनाएं भी देते रहते हैं और अपने बारे में असत्य बातें बताते हैं। ताकि दूसरे पर उनका वर्चस्व बना रहे। 


5. संबंध विकास


दूसरे व्यक्तियों के साथ व्यक्तिगत संबंध का प्रारंभ करने तथा उसे अंतरंग बनाने के लिए व्यक्तिगत सूचनाओं एवं निजी विचारों को प्रकट करना एक महत्वपूर्ण तरीका है।

प्रेम-संबंध में व्यक्ति अपने जीवन वृत्त के आदान-प्रदान से प्रारंभ कर सामान्य अभिरुचि अभिवृत्ति एवं कामनाओं की जानकारी प्राप्त करता है। मार्टन (1978) ने स्पष्ट किया है कि आत्म-अनावरण, वर्णनात्मक और मूल्यांकनात्मक दोनों होता है। वर्णनात्मक अनावरण में लोग अपने बारे में तथ्यों को बताते हैं, अन्यथा जाना नहीं जा सकता। वर्णनात्मक अनावरण का उदाहरण, जब कोई यह बताता है कि उसके बाल्यकाल में क्या हुआ था, उसने कैसे बाद की शिक्षा प्राप्त की, वह मनोरंजन के लिए किस प्रकार के कार्य करता है इत्यादि। मूल्यांकनात्मक अनावरण का उदाहरण, जब कोई व्यक्ति जब बताता है कि वह अमुक व्यक्ति का आदर करता है, किंतु उसके पड़ोसी को विश्वसनीय मानता है। वह यात्रियों में लाउडस्पीकर का उपयोग करने के विरुद्ध हो। वैलेरियन डलेगा (1984) ने बताया है कि आत्म-अनावरण से अनेक प्रकार के सामाजिक स्कर्ट भी हो सकते हैं इनमें मुख्य रूप से चार संकट प्रमुख है: 


1. अनिच्छा


किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध स्थापित करने के लिए कोई व्यक्ति व्यक्तिक सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है तथा एक दूसरे से अंतरंगता विकसित होती है। कभी-कभी दूसरा व्यक्ति किसी की निजी सूचनाओं को प्राप्त करने के बाद संबंध स्थापित करने में अनिच्छा प्रदर्शित कर सकता है। क्योंकि अनावृत सूचना को व्यक्ति का अशोभनीय गुणधर्म दूसरा व्यक्ति मान लेता है। 


2. अस्वीकृति


व्यक्ति के निजी जीवन से संबंधित सूचनाओं की जानकारी से संभव है कि लोग उसे अस्वीकार भी करें। उदाहरण यदि किसी व्यक्ति के साथ बातचीत में वह यह बताये कि वह कभी चोरी के अपराध में कुछ दिन जेल में भी जा चुका है, तो लोग उससे दूर रहने लगेंगे और उसका विश्वास आसानी से नहीं करेंगे।


3. नियंत्रण की हानि 


कभी-कभी अंतरंगता के संबंध में व्यक्ति अपने किसी ऐसी कमी को भी बता देता है। जिसका दुरुपयोग कर उसे ब्लैकमेल कर शिकार भी बना सकता है और उस पर अपना प्रभाव स्थापित कर उसे अपने नियंत्रण में रख भी सकता है। जबकि अनावृत करने वाला व्यक्ति दूसरे पर अपना नियंत्रण खो देता है।


4. विश्वासपात्र


कभी-कभी व्यक्ति अपने मित्रों से अपने बारे में गोपनीय सूचनाएं भी बता देता है, और विश्वास करता है कि उसके मित्र उस सूचना को अन्य लोगों को नहीं बतायेगा। ऐसी दशा में हो सकता है कि कभी कोई मित्र उसके साथ विश्वासघात करते हुए उसकी सूचना को अन्य किसी व्यक्ति के साथ साझा कर दे। आत्म का अनावरण तभी लाभदायक होता है, जब उसमें आदान-प्रदान की स्थिति होती है और वह भी एक स्तर तक आत्म-आवरण में व्यापक स्तर पर सांस्कृतिक एवं लिंग भिन्नता पाई जाती है। स्त्रियों की तुलना में पुरुष अपनी अंतरंगता का अनावरण कम मात्रा में करते हैं। पुरुष स्त्री संबंधों में लिंग भेद भी अनावरण भिन्नता से संबंधित अनुसंधान परिणाम अस्पष्ट है।