आत्म उन्मुखता बनाम सामूहिक उन्मुखता - Self Orientation vs Collective Orientation
आत्म उन्मुखता बनाम सामूहिक उन्मुखता - Self Orientation vs Collective Orientation
इसी तरह आत्म उन्मुखता बनाम सामूहिक उन्मुखता विन्यास प्रकारांतर में मूल्यांकन प्रक्रिया में मुख्य बात नैतिक मानक की है। नैतिक मानक का प्रश्न इस बात से उठता है कि पात्र या व्यक्ति को सामूहिकता यानी व्यापक हितों को चुनाव करना पड़ता है। इसमें किसी-न-किसी रूप में परोपकार या त्याग की भावना निहित होती है। ऐसी विन्यास प्रकारांतर की दुविधा की स्थिति आदिम आर्थिक पद्धति और तत्कालीन समाज से आधुनिक सभ्यता के काल तक मानव जीवन में सदैव बनी रही है। हमारे सामने समाजवादी समाज और समाजवादी चेतना की धारणा एक अच्छा उदाहरण है जहाँ समग्र सामाजिक प्रणाली और इसकी सभ्याओं के विन्यास सामूहिकता उन्मुखता के अनुकूल महत्वपूर्ण चयन पर आधारित है, लेकिन जैसा कि पारसन्स ने सही संकेत किया है कि ऐसे मूल्यों का संस्थागत होना सदैव क्षणिक होता है। इसका कारण यह है कि पात्र की स्थिति की तरफ प्रतिक्रिया हमेशा ही दुविधा के रूप में होती है।
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