मूक वस्तु विनिमय - silent barter
मूक वस्तु विनिमय - silent barter
जनजातियों में यह एक अनोखी प्रथा पाई जाती है। हर्षकोबिट्स ने इसे मौन व्यापार कहा। इस प्रकार के व्यापार में दोनों पक्षों में भेंट हुए बिना ही वस्तुओं का विनिमय होता है। यह प्रथा श्रीलंका की वेद्दा जनजाति तथा उत्तरांचल के राजी जनजाति में पाई जाती है। यह लोग एक ही स्थान पर रात के अंधकार में अपने द्वारा उत्पादित वस्तुओं रख देते हैं तथा जिन वस्तुओं की उन्हें आवश्यकता होती है उनका संकेत छोड़ देते हैं। कुछ समय पश्चात दूसरा पक्ष आकर अपने जरूरत की चीजें ले जाता है और संकेत के अनुसार अपनी वस्तु में छोड़ जाता है। इसी प्रकार के व्यापार मलाया के सेमंग तथा सकाई जनजाति के बीच होता है। यह लोग आपस में शत्रु होते हुए भी दैनिक जीवन की आवश्यक वस्तुओं का व्यापार करते हैं। अपनी शत्रुता को व्यापार से अलग रखते हैं। अफ्रीका के उत्तरी पश्चिमी तट पर निवास करने वाली जनजातियां कार्थिगिनियन व्यापारियों के साथ मूक व्यापार करती है।
यह लोग तट पर आदिवासियों की आवश्यकता अनुसार दैनिक जीवन से संबंधित वस्तु में रख देते हैं और आग जला देते हैं इसका धुआं देखकर आदिवासी लोग आते हैं। बदले में सोना रखकर अपनी आवश्यकता की वस्तु ले लेते हैं। इस प्रकार के अन्य उदाहरण आसाम के नागा कलात्मक वस्तुओं का व्यापार। राजस्थान के भीलों के कृषि उत्पाद से करते हैं। टोडा दूध का और कोटा बांस की वस्तुओं का व्यापार करते हैं। जापान की ऐनु अपने लकड़ी के उत्पादों जैसे थालियां, चम्मच तथा धातु के बर्तन वाले चाकू आदि का व्यापार अपने पड़ोसी जनजाति नारोन से चमड़े के वस्त्र और थैले आदि के बदले करते हैं। इस प्रकार साइबेरिया की चूची जनजाति, अलास्का की अलास्कान जनजाति, कांगो की पिग्मी जनजाति तथा बंटू जनजाति अफ्रीका आदि में वस्तु विनिमय देखने को मिलता है।
वार्तालाप में शामिल हों