जादू और धर्म में समानताएँ , जादू और धर्म में विभिन्नताएँ - Similarities between magic and religion Differences between magic and religion
जादू और धर्म में समानताएँ , जादू और धर्म में विभिन्नताएँ - Similarities between magic and religion Differences between magic and religion
i. जाद और धर्म दोनों पवित्र के हैं और भावनात्मक तनाव के बीच पैदा होते हैं और कार्य करते हैं।
ii. दोनों घटनाएं भावनात्मक तनाव से बचकर निकलती हैं, जो आदिम लोगों की श्रेणी के तर्कसंगत ज्ञान के आधार पर दूर नहीं किया जा सकता है।
iii. पौराणिक परंपराएँ जादू और धर्म दोनों को समाहित करती हैं। दोनो क्षेत्रों से जुड़े टैबू और प्रथाएं उन्हें ‘अपवित्र के कार्यक्षेत्र से अलग करती हैं।
iv. दोनों का संबंध अतिमानवीय शक्तियों से है।
V. दोनों में परंपरागत ज्ञान पाया जाता है।
vi. दोनों को संपन्न करने हेतु विशेषज्ञ होते हैं।
vii. जादू एवं धर्म का उद्देश्य मानसिक तनाव व उद्वेगों की शक्ति से मुक्ति दिलाना है।
viii. मलिनोव्सकी के अनुसार धर्म भावनात्मक आवश्यकताओं से उत्पन्न होते हैं।
ix. दोनों कल्पना की उपज है।
जादू और धर्म में विभिन्नताएँ
धर्म और जादू के अंतर को देखे तो, हम पाते हैं की विभिन्नताएँ निम्नलिखित क्षेत्रों में है।
i. जादुई कृत्य एक साध्य के लिए एक साधन है, जिसका उन्हें पालन करना चाहिए। धार्मिक कृत्य आत्म-निहित कार्य हैं, आत्म-पूर्ति में प्रदर्शन किए जाते हैं।
li. जादू की कला में एक स्पष्ट रूप से चिह्नित और सीमित तकनीक है जिसमें जादू, संस्कार और जादूगर मुख्य तत्व हैं। धर्म के पास ऐसी कोई सरल तकनीक नहीं है। इसके कई पहलू और उद्देश्य और इसके तर्क अपने विश्वास और व्यवहार के कार्य में निहित हैं।
iii. जादुई विश्वास एक विशेष वर्तनी के आधार पर कुछ परिणामों को लाने के लिए किसी शक्ति में विश्वास है। दूसरी ओर, धर्म अलौकिक शक्तियों की एक पूरी श्रृंखला है।
iv. धर्म में पौराणिक परंपरा जटिल, रचनात्मक और विश्वास के सिद्धांतों पर केंद्रित है। जादू में, शुरुआती पौराणिक कथाएँ का आत्मश्लाघी वर्णन है।
v. जादुई कला विशेषज्ञों के लिए सीमित है। यह पीढ़ी से पीढ़ी तक एक शमन से दूसरे तक को सौंप दिया जाता है। धर्म में हर कोई दीक्षा के माध्यम से एक सक्रिय भाग लेता है, उदाहरण के लिए समुदाय के प्रत्येक सदस्य को शामिल होना होता है। धर्म में आध्यात्मिक माध्यम की एक विशेष भूमिका है। लेकिन यह एक पेशेवर भूमिका नहीं है क्योंकि इसे सीखा जा सकता है।
vi. जादू में हमारे पास सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार होते हैं। क्योंकि जादू प्रत्यक्ष परिणामों के संदर्भ में व्यावहारिक निहितार्थ हैं जो सकारात्मक और नकारात्मक जादू के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जबकि धर्म का केवल सकारात्मक प्रकार ही है।
vii. जादू में अलौकिक शक्ति को अधीन करने का प्रयास किया जाता है जबकि धर्म में अधीनता स्वीकार की जाती है।
viii. दुर्खीम ने धर्म को पवित्र और जादू को अपवित्र माना।
ix. धर्म में व्यक्ति अलौकिक शक्ति से डरता है जबकि जादू में वह अलौकिक शक्ति को वश में करने का दावा करता है।
X. धर्म समाजिक तत्व है जबकि जादू व्यक्तिगत तथ्य है।
xi. जादू वैज्ञानिक है तथा इसमें कार्य कारण है, परंतु धर्म वैज्ञानिक नहीं है इसलिए इसमें कार्य कारण भी नहीं है।
xii. बोहानन के अनुसार जादू विश्व के अव्येक्तिक दृष्टि से देखता है, जबकि धर्म किसी देवता के रूप में व्यक्तिगत रूप में पाया जाता है।
xiii. मलिनोव्सकी के अनुसार जादू का उद्देश्य स्पष्ट एवं निश्चित है जबकि धर्म का उद्देश्य स्पष्ट वह निश्चित नहीं है।
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