समाज जीवविज्ञानी ई. ओ. विल्सन - Social biologist E. O. wilson
समाज जीवविज्ञानी ई. ओ. विल्सन - Social biologist E. O. wilson
समाज जीव विज्ञानी ई. ओ. विल्सन ने स्त्री-पुरुष असमानता को उचित ठहराने के लिए डार्विन के प्राकृतिक चुनाव की धारणा का सहारा लिया है। उनके मुताबिक, जो मानव व्यवहार समूची मानव प्रजाति की रक्षा के अनुकूल होते हैं वे जीनों (जैविक) में अंकित हो जाते हैं। उनका यह भी मत है कि जिस समूह में मादाएँ बच्चों को पालने-पोसने का काम करती हैं और नर भोजन जुटाने का काम करता है वह विकास की राह पर आगे निकाल आता है। श्रम का यह विभाजन और तदजन्य आचार व्यवहार जीनीय संरचना का हिस्सा हो जाता है। मानव प्रजाति इसी तरह के समूह का एक उदाहरण है इस तर्क के हिसाब से मातृत्व सामाजिक या सांस्कृतिक प्रकार्य न होकर स्त्री के शरीर और मन का अनिवार्य हिस्सा होता है। इस तरह, विल्सन भी जैविक निर्धारणवाद के दायरे में सीमित होकर रह जाते हैं।
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