सामाजिक, आर्थिक एवं व्यावसायिक जीवन - social, economic and professional life

सामाजिक, आर्थिक एवं व्यावसायिक जीवन - social, economic and professional life


पारसन्स के संबंध में कहा जाता है कि वे अमेरिकी संकट की पैदावार थे, परंतु उन्होंने अमेरिकन समृद्धि का फल भोगा। प्रथम विश्व युद्ध के बाद जब पारसन्स पढ़कर निकले तब संयुक्त राज्य अमेरिका आर्थिक संकट का शिकार था। पारसन्स संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य पश्चिम के रूढ़िवादी और संरक्षणवादी परिवेश में पैदा हुए, पले और बढ़े। उनका जन्म एक धार्मिक परिवार में हुआ था। इसलिए एक संरक्षणवादी एवं क्रांति विरोधी दृष्टिकोण का होना विचित्र नहीं लगता है। पारसन्स ने अपने जीवन के उत्तरार्ध में परिवर्तन संबंधी और क्रांति संबंधी जो विचार दिए. वे समकालीन घटनाओं के परिचायक अधिक थे न कि उनके जीवन और विकास के आर्थिक, सामाजिक परिवेश के कारण ऐसा था। परिवर्तन संबंधी विचारों में संशोधन का बड़ा कारण पारसन्स के विचारों की आलोचना थी। पारसन्स अपने विचारों में ईमानदारी से संशोधन कर रहे थे।


अमेरिका में राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने और अमेरिकी शासक वर्ग ने प्रथम विश्व युद्ध के बाद उन परिस्थितियों को संभाल लिया जो कि जर्मनी एवं इटली में फासीवाद लाने में सहायक हुई थे।

इस समय तक पारसन्स सामाजिक क्रिया और अंतक्रिया की दृष्टि से मजबूती से जुड़े थे। द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका की भागीदारी, अमेरिका का दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरना और विश्व पूँजीवादी व्यवस्था को पुनर्निर्मित करने का अमेरिकी प्रयास वह आर्थिक और राजनैतिक पृष्ठभूमि थीं जिसने पारसन्स को सामाजिक क्रिया से सामाजिक व्यवस्था की ओर संक्रमण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने देखा कि किसी एक उद्योगपति या उद्योगपतियों के संघ ने नहीं बल्कि पश्चिम के देशों का अपने विरोधी को भुला कर एक मंच पर आना ही, पूँजीवाद के पुनर्जीवन का बड़ा कारण था।


1950 से 1970 के बीस वर्ष जहाँ पूँजीवाद के पुनर्जीवन का काल था. वहीं सोवियत समाजवाद के आगे बढ़ने का भी समय था। पश्चिमी पूँजीवाद ने इस अवधि में प्रौद्योगिकी में तेज प्रगति की। इस काल में साठ का दशक अफ्रीकी स्वतंत्रता का दशक भी कहा जाता है। इस अवधि में पश्चिमी पूँजीवाद एवं समाजवादी खेमे में घोर शीतयुद्ध हुआ। इस शीतयुद्ध में अंततः समाजवाद पराजित हो गया. परंतु पचास और साठ के दशक में समाजवाद के उभार और वियतनाम युद्ध की विभीषिका ने प्रकार्यवाद की शवयात्रा को आरंभ कर दिया। टालकट पारसन्स ने अगस्त कांट और हर्बर्ट स्पेंसर जैसे समाजशास्त्रियों का शोक संदेश लिखा था परंतु सी. राइट मिल्स आदि की आलोचनाओं से पारसन्स अपने जीवनकाल में ही उपेक्षित हो गए। पारसन्स के विचारों की विशेषताओं में पहले ही लिखा है कि उन्होंने अपने विचारों में संशोधन किया। विशेष रूप से सामाजिक परिवर्तन संबंधी विचारों में उन्होंने बड़ा परिमार्जन किया। विश्व की घटनाएँ इतने तेजी से बदली कि पारसन्स के परिमार्जन उनसे अपना तालमेल नहीं बिठा सके।