सामाजिक प्रभाव तथा सामाजिक यथार्थ , योग्यताएं , संवेग - Social Influence and Social Reality, Abilities, Emotions

सामाजिक प्रभाव तथा सामाजिक यथार्थ , योग्यताएं , संवेग - Social Influence and Social Reality, Abilities, Emotions


सामाजिक तुलना सिद्धांत में यह अभिग्रह है कि जब लोगों को अपने मतों की वैधता का सत्यापन सामाजिक यथार्थ से स्पष्ट नहीं होता है, तो वे अपने विचारों का आदान-प्रदान करते है। ऐसी दशा में समूह के लोग व्यक्ति के विचारों को प्रभावित करने का प्रयत्न करते हैं, और व्यक्ति प्रयत्न करता है कि वह अपने विचारों को सही सिद्ध करें। फेस्टिंगर ने सामाजिक तुलना सिद्धांत के परिकल्पना के लिए एक प्रायोगिक अध्ययन किया। इसमें स्नातक स्तर के छात्रों का 4 समूह बनाया। जो समूह की सशक्तिशीलता तथा विषय की प्रासंगिकता पर आधारित है। उच्च निम्न


उच्च प्रथम समूह द्वितीय समूह 


निम्न तृतीय समूह चतुर्थ समूह


• सामाजिक यथार्थ तथा योग्यताएं


फेस्टिंगर अपने सिद्धांत में यह बताया है कि लोग अपनी योग्यता का मूल्यांकन करने के लिए अपनी तुलना दूसरों के साथ करते हैं, और अपने ही समक्ष लोगों का चयन करें। अनेक अध्ययनों के बाद जान्ना (1975) ने बताया है कि लोग अपनी योग्यता का मूल्यांकन उन्हीं लोगों के साथ करना चाहते हैं, जिन्होंने अधिक लब्धांक प्राप्त किया।


• सामाजिक यथार्थ एवं संवेग


सामाजिक तुलना सिद्धांत के परिप्रेक्ष्य में यह बताया गया है कि लोग अपने संवेग या भावनाओं का मूल्यांकन कैसे करते हैं? जब लोगों में अपनी भावनाओं एवं संवेगों के बारे में अस्पष्टता होती है तब वे ऐसे लोगों को खोजते हैं जो वैसे ही संवेग के होते हैं और उनके साथ अपनी तुलना करते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि व्यक्ति अपने संवेगों की तुलना अधिक संवेग वाले लोगों के साथ करते हैं।