सामाजिक शोध - Social Research

 सामाजिक शोध - Social Research


सामाजिक शोध को परिभाषित करते हुए पी.वी. यंग (1977) ने लिखा है, "सामाजिक शोध एक वैज्ञानिक प्रयास है जिसका उद्देश्य तार्किक एवं व्यवस्थित विधियों की सहायता से नए तथ्यों की खोज या पुराने तथ्यों का परीक्षण अथवा उनकी सत्यता की परख हो सकता है: या तथ्यों के अनुक्रमों, अंतर्संबंधों तथा कारणात्मक व्याख्याओं का विश्लेषण करना हो सकता है; या नवीन वैज्ञानिक तकनीकों, उपकरणों, अवधारणाओं तथा सिद्धांतों को विकसित करना हो सकता है. जो मानवीय व्यवहार का विश्वसनीय तथा प्रामाणिक अध्ययन करने में सहायक सिद्ध हो सके।" समाजशास्त्र के कोश में फिशर (1944) ने कहा है, "सामाजिक शोध किसी सामाजिक घटना पर प्रयोग की जाने वाली एक ऐसी व्यवहारिक कार्य प्रणाली है,

जिसका उद्देश्य किसी समस्या का समाधान अथवा किसी प्रकल्पना का परीक्षण या नवीन तथ्यों की खोज या विभिन्न तथ्यों के बीच नवीन संबंधों की खोज करना है।"


इस प्रकार की कार्य विधि द्वारा प्राप्त सामग्री के अनुभवी तथ्य और इस कार्य विधि को अनुभवी की विधि कहते हैं। अनुभवी से तात्पर्य हमारी इंद्रियों (नाक, कान, आंख, जिव्हा और स्पर्श) के आधार पर प्राप्त ज्ञान से है। यह ज्ञान कल्पना और अंतःप्रज्ञा द्वारा प्राप्त ज्ञान से भिन्न होता है। इस ज्ञान की विशेषताओं का आगे 'ज्ञान के स्रोत और विज्ञान विषयों के वर्णन-विश्लेषण में विस्तृत वर्णन किया गया है। संक्षेप में, वैज्ञानिक प्रयास से तात्पर्य वैज्ञानिक विधि के प्रयोग से है।