सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि - socioeconomic background

सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि - socioeconomic background


मर्टन के आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि में एक विशेष यह है कि एक मजदूर वर्ग परिवेश में पैदा होकर उन्होंने बौद्धिक सृजन किया, यह एक सामान्य बात नहीं है। आरंभिक जीवन गंदी बस्तियों में व आवारा बच्चों के साथ खेलने में बीता वे अमेरिकी समाज की मुख्याधारा के विरुद्ध पले-बढ़े मर्टन ने प्रकीयवाद के चौखटे में ही जो परिवर्तन का प्रारूप प्रस्तुत किया संघर्ष को अनिवार्य एवं नियमित प्रक्रिया माना. क्रांतिकारी परिवर्तनों को संभव कहा. उनके अनुसार संरचनाओं में सब कुछ एकीकृत नहीं होता निश्चित रूप से उनके आर्थिक और सामाजिक परिवेश के कारण ही था।


मर्टन के माता-पिता यूरोप के पूर्वी देश पोलैंड के दक्षिण से अमेरिका आए वहाँ से साथ में काफी लोग आए. लेकिन एक यहूदी अल्पसंख्यक समूह का एहसास मर्टन को अपने जीवन भर सताता रहा। मर्टन ने अमेरिकी आँखों से दूसरे विश्वयुद्ध को देखा।

उन्होंने विज्ञान के इतिहास को छोड़कर बाकी सभी रचनाएँ द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद लिखीं। आर.के. मर्टन ने 1950 में अमेरिकी समाजशास्त्र परिषद् के अध्यक्ष के रूप में अमेरिकी समाजशास्त्र की मुख्यधारा की जो आलोचना की एवं संघर्ष की प्रक्रिया को उन्होंने जितना नियमित एवं महत्वपूर्ण कहा, वह द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणामों, चीन की क्रांति. भारत समेत अनेक देशों की स्वतंत्रता जैसे घटनाओं के प्रति मर्टन की संवेदनशीलता थी।


मर्टन ने जिस समय प्रकीयबाद में राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक अवस्थाओं के कारण महत्वपूर्ण संशोधन का प्रस्ताव किया, लगभग उसी समय सी. राइट मिल्स ने परिवर्तनवादी की धारण को प्रस्तुत किया। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद उन्होंने यह अनुभव किया कि यूरोप के सारे देश इस युद्ध के कारण तबाह हो गए, पर अमेरिका ने इस युद्ध से अपने को अलग कर लिया।


मर्टन इस बात के गवाह थे कि पश्चिम के देशों ने सामूहिक प्रयास से युद्ध की मार से अपने को उबार लिया। मर्टन 1956 में रूस गए। धर्म की घटती हुई भूमिका को देखा।