समाजशास्त्रीय सिद्धांत - Sociological theory
समाजशास्त्रीय सिद्धांत - Sociological theory
प्रत्येक विषय वैज्ञानिक अनुसंधान द्वारा अपनी विषय वस्तु से संबंधित तथ्यों को यथार्थ रूप में समझने का प्रयास करता है। इन तथ्यों को परस्पर संबंधित करके सार्वभौमिक नियम या सिद्धांतों के निर्माण करने का प्रयास किया जाता है। समाजशास्त्र भी इसमें कोई अपवाद नहीं है।
समाजशास्त्रीय सिद्धांत समाज, सामाजिक संबंधों तथा सामाजिक व्यवहार से संबंधित तथ्यों के अंतर संबंधित व्यवस्था है। समाजशास्त्रीय शोध या अनुसंधान में तथ्यों को आनुभविक रूप से एकत्रित किया जाता है तथा फिर एक ही पहलू या विषय से संबंधित अनेक तथ्यों को मिलाकर सिद्धांतों का निर्माण किया जाता है। समाजशास्त्र का एक भाग श्रेणियों में क्रमबद्ध ढांचे की इसी वर्णन से मिलकर बना है। जिसमें केवल साधारण सिद्धांत-निरूपण ही महत्वपूर्ण है।
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