शिक्षा का समाज शास्त्र , महत्व - Sociology, Importance of Education

 शिक्षा का समाज शास्त्र , महत्व - Sociology, Importance of Education


यह शिक्षा समाजशास्त्र का वर्तमान चरण है। इसकी जानकारी अधिकांश भारतीय शिक्षकों को नहीं है। उन्हें इसकी जानकारी अवश्य होनी चाहिए| काल मार्क्स ने इसकी शुरूवात की। एल्यूसर के अनुसार शिक्षा शासक वर्ग की विचारधारा को ही प्रसारित करती है और श्रम विभाजन में बड़े वर्गों के लिए उन्हीं दृष्टिकोणों और व्यवहारों के मैनेजर प्रशासक और राजनीतिज्ञों को पैदा करती है जिससे कि आम श्रमिक का शोषण किया जाता है।


शिक्षा के समाजशास्त्र का महत्व 


वर्तमान में शिक्षा एकांत में चलने वाली प्रक्रिया नहीं रहगयी है। उसे समाज में रहकर ही प्राप्त किया जाता है . शिक्षा समाज के लिए दी जाती है तथा समाज के द्वारा दी जाती है। शिक्षक एवं शिक्षा संस्थानों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कई मामलों में समाल राज्य की सहमति लेना पड़ती है, उसे समाज के मूल्यों आदर्शों के आधार पर काम कारण पड़ता है। अतः समाज एवं शिक्षा का परस्पर संबंध अभिन्न बन गया है।