समाजमितीय विधि - sociometric method

समाजमितीय विधि - sociometric method


समाजमिति प्रविधि के निर्माण का प्रसिद्ध श्रेय समाजशास्त्री मोरेनो को जाता है। तकनीकी के मूल रूप का विवरण प्रस्तुत करते हुए मेरीने ने बताया कि इस तकनीकी के छः आवश्यक अवयव या पक्ष हैं-


1. इस तकनीकी के माध्यम से किसी समूह के सदस्यों से प्रोडक्ट संग्रह सदस्य के समक्ष समूह की सीमा को परिभाषित करने के बाद किया जाता है।


2. व्यक्ति के समूह की किसी एक या अथवा सीमित संख्या वाली क्रियाओं जैसे पढ़ने कार्यालय में कार्य करने. सिनेमा जाने यात्रा करने का उल्लेख मापदंड के रूप में किया जाता है। 


3. प्रत्येक व्यक्ति को यह चुनाव करना पड़ता है कि वह किन किन व्यक्तियों के साथ मापदंडईय क्रिया करना स्वीकार करेगा और किन किन व्यक्तियों के साथ इन क्रियाओं को करना नहीं चाहेगा। व्यक्तियों की स्वीकृति और अस्वीकृति के संबंध में सदस्य को मनचाहे संख्या में चुनने की स्वतंत्रता दी जाती है।


4. यह चुनाव सदस्य एकांत में निजी तौर पर गोपनीयता के साथ करता है और अनुसंधानकर्ता के अतिरिक्त अन्य किसी को उसके द्वारा चुने गए नाम या नामों की जानकारी नहीं दी जाती। 


5. चुनाव के समय उसके समक्ष जो प्रश्न प्रस्तुत किया जाता है उसे ऐसी भाषा में व्यक्त किया जाता है कि प्रयोज्य को वह आसानी से समझ में आ जाए। 


6. इन स्वीकृति और अस्वीकृति यों का उपयोग उस समूह को पुनर गठित करने के लिए किया जाता है।


समाजमिति किस मूल रूप का उपयोग जिस रूप में किया जाता है वह मुरैनो द्वारा प्रतिपादित रूप से भिन्न है। आज कहीं भी समाजमिति से प्राप्त शुद्ध तत्वों के आधार पर समूह को पुनरगठित नहीं किया जाता, क्योंकि ऐसा करना अधिकांश स्थितियों में असंभव है। दूसरी ओर बहुत कम अनुसंधानों में व्यक्ति की सीमित संख्या में दूसरों को स्वीकार और अस्वीकार करने का विकल्प समाजमिती प्रक्रिया के अंतर्गत प्रस्तुत किया जाता है। आजकल इस तकनीकी से किए जाने वाले अनुसंधान में एक, दो या तीन लोगों को किसी क्रिया के लिए स्वीकार करने और उतने ही लोगों को अस्वीकृत करने का विकल्प किया जाता है। तीसरी बात यह है

कि समाजमिती तकनीकी के उपयोग के लिए यह भी अनिवार्य नहीं माना जाता कि चुनने वाले के समक्ष समूह की सीमा स्पष्ट कर दी जाए, और साथ ही साथ यह भी आवश्यक नहीं माना जाता की आमने-सामने अंतरक्रिया करने वाले और छोटे आकार के समूह को ही लिया जाए। बड़ी संख्या वाले समूहों में भी इस तकनीक द्वारा व्यक्तियों के स्वीकृत या अस्वीकृत विकल्पों का उपयोग किया जाता है। इस तरह समाजमिती तकनीक के वर्तमान रूप में किसी भी क्रिया के लिए किसी भी प्रकार के समूह में पाए जाने वाले व्यक्तियों द्वारा अन्य व्यक्तियों को गोपनीय हृदय से स्वीकार और अस्वीकार करने का विकल्प देकर प्रदत्त प्राप्त किया जाता है। इसीलिए कालिंजर ने समाजमिति की परिभाषा करते हुए बताया है कि इस तकनीकी में किसी समूह के प्रत्येक सदस्य दी हुई संख्या में, गोपनीय रूप से उन व्यक्तियों के नामों की जानकारी की जाती है जिनको वह किसी निर्धारित संकृत्य में सहभागी बनाने के लिए उद्धत है और साथ ही साथ दी हुई संख्या में से उन लोगों के भी नाम जानने की कोशिश की जाती है जिन के साथ वह उस संकृत्य में सहभागी बनने के लिए उद्दत नहीं है। समूह कैसा हो, सहभागी होने के लिए कैसी क्रिया हो और कितने लोगों के नाम संस्कृतय के लिए स्वीकृत और कितने को अस्वीकृत करने का विकल्प दिया जाए, अनुसंधानकर्ता के उद्देश्य और अभिकल्प पर निर्भर करता है। इस प्रकार इस तकनीकी से किसी संकृत्य में सहभागी होने की वरीयता और सहभागी न होने की वरीयता की सूचना प्राप्त होती है।