प्रकार्यात्मक विश्लेशण की कुछ पद्धतिशास्त्रीय समस्याए - Some Methodological Problems of Functional Analysis

प्रकार्यात्मक विश्लेशण की कुछ पद्धतिशास्त्रीय समस्याए - Some Methodological Problems of Functional Analysis


प्रकार्यात्मक विश्लेषण प्राणीशास्त्र में प्रयोग किए जाने वाले प्रारूप के आधार पर विकसित हुआ है, परंतु प्राणीशास्त्रीय प्रारूप की सब बातों का उपयोग समाज के अध्ययन में नहीं है और कुछ बातें समाज की ऐसी हैं कि उनके अध्ययन की व्यवस्था प्राणीशास्त्रीय पद्धति में नहीं है। सर्वप्रथम प्रकार्यात्मक विश्लेषण की यह कठिनाई है कि वह प्रयोगों (Ecpriments) का प्रयोग नहीं कर सकता जैसा कि प्राणीशास्त्र में किया जाता है। प्राणीशास्त्र में निश्चित प्रत्यय एवं अवधारणाएँ (Techniques), अनुसंधान प्रारूप (Research Design), प्रमाणीकरण के यंत्र ( Instruments of Validation) आदि हैं। पर प्रकार्यात्मक विश्लेषण के पास अभी ऐसा कुछ नहीं है। इसका परिणाम यह हुआ कि लोगों ने मनमाने प्रयोग किए हैं और जिसकी जो समझ में आया किया है। कुछ लोग समाज के अंगों का तथ्यात्मक अध्ययन करते हैं, तो कुछ प्रतिमानित व्यवहार का समाज के लिए मूल्य निर्धारित करते हैं, तो कुछ परंपरात्मक सामाजिक संगठनों का वर्णन मात्र ही करते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि अभी तक प्रकार्यात्मक विश्लेषण के नाम पर कोई भी काम किया जा सकता है। कोई सर्वसम्मत अनुसंधान प्रारूप नहीं निश्चित हुआ है। इसके कारण यह पद्धति भ्रमित हो गई है। मर्टन ने एक अनुसंधान प्रारूप तैयार किया है जो इस दिशा में पहला कदम है।