विनिर्दिष्टता बनाम प्रसरणता - Specificity vs. Variance

विनिर्दिष्टता बनाम प्रसरणता - Specificity vs. Variance


विनिर्दिष्टता बनाम प्रसरणता विन्यास प्रकारांतर का संबंध भूमिका निष्पादन के विषय क्षेत्र से है। इस संदर्भ में क्षेत्र का मतलब सामाजिक अन्योन्य क्रिया की प्रकृति से है। डॉक्टर और रोगी के बीच या बाजार में ग्राहक और सामान विक्रेता के बीच सामाजिक अन्योन्य क्रिया का एक बहुत ही विशिष्ट क्षेत्र है। इन अन्योन्य क्रियाओं की प्रकृति की व्याख्या अन्योन्य क्रियाओं के अत्यंत सीमित संदर्भ में की गई है। एक डॉक्टर को अपने रोगियों के इलाज के लिए तथा उन्हें दवा देने के लिए उनकी सामाजिक वित्तीय या राजनीतिक पृष्ठभूमि समझने के जरूरत नहीं होती। डॉक्टर का कार्य बहुत विशिष्ट प्रकार का है और यही बात बाजार में सामान के विक्रेता की है, जिसे अपने ग्राहकों के जीवन को सामान्य बातें जानने की कतई आवश्यकता नहीं होती। पात्रों के बीच प्रतिक्रिया के मानकों की दृष्टि से इन भूमिकाओं की विशिष्ट भूमिकाएँ कहा जाएगा।


इसके विपरीत कुछ भूमिका संबंध बहुत सामान्य और व्यापक प्रकृति के है। ऐसी भूमिकाओं में अन्योन्य क्रिया के कई पहलू होते हैं। इस प्रकार के भूमिका संबंधों के कुछ उदाहरण है- मित्रता संबंध पति-पत्नी के बीच दाम्पत्य संबंध विभिन्न स्तरों के रिश्तेदारों के बीच संबंध।


ये सब संबंध ऐसे हैं, जहाँ व्यक्ति किसी रिश्तेदार आदि के साथ किसी विशिष्ट संवर्ग में उस रूप में अंतर किया नहीं करता, अपितु वह विसरित रूप में दो घनिष्ट मित्रों की तरह अतर्क्रिया करता है। यहाँ अन्योन्य क्रिया का क्षेत्र लचीला खुला और व्यापक प्रकृति का है।


पारसन्स के अनुसार विन्यास प्रकारांतर न केवल सामाजिक प्रणाली में भूमिका अंतर्क्रिया और भूमिका अपेक्षाओं को निरूपित करते हैं.

बल्कि इसके साथ ही व्यापक निर्देश भी देते हैं, जिसमें सामाजिक प्रणाली के अधिकांश सदस्य अपनी भूमिकाएँ चुनते हैं। इससे हमें सामाजिक प्रणाली की प्रकृति की जानकारी भी मिलती है। उदाहरण के तौर पर सामाजिक प्रणाली के रूप में परिवार को ही लीजिए। एक परिवार में सदस्यों को भूमिका अपेक्षाएँ मोटे तौर पर सामूहिकता उन्मुखता विशिष्टतावादी प्रदत्त परक और प्रसरणात्मक होगी। इसके विपरीत यदि आप किसी चिकित्सा संघ बार संघ या छात्र संघ के सदस्य हों तो उसका उदाहरण लीजिए। यहाँ भूमिका अपेक्षाएँ और भूमिका निष्पादन के मानक अधिकांश रूप से भावात्मक तटस्थता, आत्म उन्मुखता ( प्रतियोगिता के कारण ) सार्वभौमिकता, उपलब्धि और विनिदिष्टता के विन्यास प्रकारांतर की ओर उन्मुख होंगे। परंतु ये सब अतिवादी उदाहरण है। वास्तविक जीवन में विन्यास प्रकारांतर की दृष्टि से चुनाव की दुविधा उपर्युक्त उदाहरणों की तुलना में कहीं अधिक अनिश्चित और तनावपूर्ण होती है।


अब तक आपने सामाजिक प्रणाली की विभिन्न विशेषताओं के बारे में पढ़ा। इससे अगले भाग में हम सामाजिक प्रणाली के उन पहलुओं पर विचार करेंगे, जिन्हें पारसन्स सामाजिक प्रणाली को सुचारू रूप से कार्य करने लायक बनाने के लिए पूर्व आवश्यकता मानता है।