गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प के चरण - Stages of Qualitative Research Design

 गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प के चरण - Stages of Qualitative Research Design


अनुसंधानकर्ता द्वारा गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प के तहत निम्न वैज्ञानिक चरणों को अपनाया जाता है -


1- शोध प्रश्नों की पहचान


गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प के मुख्य अवयव के रूप में शोध प्रश्नों को माना जाता है। शोध प्रश्न इस प्रकार के अनुसंधान अभिकल्प के लिए न केवल मुख्य अवयव होते हैं, बल्कि ये पूरे शोध में मूल भूमिका का भी निर्वहन करते हैं। इन प्रश्नों के आधार पर ही पूरी शोध की आधारशिला निर्मित होती है।


2- अध्ययन क्षेत्र का चयन


गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प में अगले चरण के रूप में अध्ययन क्षेत्र का चयन किया जाता है। अध्ययन क्षेत्र के चयन हेतु अनुसंधान के लिए निर्धारित किए गए उद्देश्यों का सहारा लिया जाता है। अनुसंधान के उद्देश्यों की भूमिका अध्ययन क्षेत्र को चयनित करने में महत्वपूर्ण होती है।


3- उत्तरदाताओं का चुनाव


इसके बाद यह निर्धारित करना आवश्यक रहता है कि तथ्यों के संकलन हेतु किस प्रकार के उत्तरदाताओं का चयन किया जाएगा तथा उनके चयन हेतु कौन सी निदर्शन तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। उत्तरदाताओं के चयन के पश्चात यह भी निर्धारित कर लेना उचित रहता है कि उनसे किस प्रकार के प्रश्नों को पूछा जाएगा। सामान्यतः गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प के अंतर्गत खुले प्रकार के प्रश्नों का प्रयोग किया जाता है तथा ऐसा इसलिए किया जाता है कि उत्तरदाताओं को प्रश्नों के उत्तर देने में अधिक स्वतन्त्रता प्राप्त हो सके और उनके उत्तर विस्तृत व वस्तुनिष्ठ प्रकार के हों। 


4 प्रविधियों व तकनीकों का चयन


अध्ययन क्षेत्र तथा उत्तरदाताओं के चयन के पश्चात तथ्यों के संकलन हेतु प्रविधियों व तकनीकों की पहचान कर ली जाती है। इसमें इस बात का ध्यान रखा जाता है

कि प्रयुक्त की गई तकनीकें असंरचित प्रकार की हों, ताकि अनुसंधानकर्ता और उत्तरदाता के मध्य के वार्तालाप में उत्तरदाता को अपने पक्ष और उत्तर को प्रस्तुत करने में अपेक्षाकृत अधिक महत्व मिल सके। 


5- तथ्यों का विश्लेषण


तथ्यों के संकलन के पश्चात उनका विश्लेषण किया जाता है। इस प्रकार के अध्ययन में तथ्यों के विश्लेषण में अनुसंधानकर्ता का अधिक समय व परिश्रम लगता है तथा साथ ही उसे पर्याप्त सावधानी भी बरतने की आवश्यकता पड़ती है। ऐसा नहीं करने पर अनुसंधान की वैधता व वैधानिकता के दूषित होने का खतरा रहता है। 


6- लेखन कार्य


इसके पश्चात अंतिम चरण के रूप में लेखन कार्य किया जाता है। इसमें अनुसंधान से प्राप्त निष्कर्ष तथा सम्पूर्ण विश्लेषण विधि के बारे में यथा विस्तार चर्चा प्रस्तुत की जाती है। इसकी सहायता से अनुसंधान में अपनाए गए प्रत्येक चरण व क्रियाविधि को क्रमवार प्रस्तुत किया जाता है।