संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक विश्लेषण या पद्धति - structural-functional analysis or methodology
संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक विश्लेषण या पद्धति - structural-functional analysis or methodology
प्रकार्यात्मक विश्लेषण ( Functional analysis) या प्रकार्यात्मक पद्धति (Functional Method) या संरचनात्मक प्रकार्यात्मक विश्लेषण (Structural - Functional Analysis) या संरचनात्मक प्रकार्यात्मक पद्धति (Structural Functional Method) समाजशास्त्र और समाजविज्ञानों की वह अध्ययन पद्धति है जो प्रकार्यवाद (Functionalism) के सिद्धांतों एवं मान्यताओं पर आधारित है। प्रकार्यात्मक विश्लेषण अन्य सभी विश्लेशणों के समान सैद्धांतिक विवेचन (Theoretical Discussion), तथ्य संकलन (Data Collection) और पद्धति-शास्त्रीय व्याख्या ( Methodological Interpretation) को सन्निहित करता है। मर्टन ने लिखा है "प्रकार्यात्मक विश्लेषण अन्य सभी व्याख्यात्मक योजनाओं के समान सिद्धांत, पद्धति और तथ्य के त्रिसंबंधों पर आश्रित है।"
प्रकार्यात्मक विश्लेषण प्रकार्यवादी व्याख्या एवं मान्यताओं पर आधारित है। प्रकार्यवादी व्याख्या यह है कि समाज एक पूर्णता है और सावयव (Organism) के ही समान उसके विभिन्न अंग होते हैं। हर अग के पूर्णता (Whole) के प्रति कुछ प्रकार्य होते हैं। अंग एक-दूसरे से पारस्परिक रूप से संबंधित एवं आश्रित हैं। एक अंग को समझने के लिए अन्य अंगों के प्रकार्यों को समझना आवश्यक है या एक अंग का अध्ययन संपूर्णता के संदर्भ में ही किया जा सकता है। संपूर्णता में एक प्रकार्यात्मक एकता पाई जाती है और इसी प्रकार्यात्मक अध्ययन के द्वारा संभव है। इसलिए किसी समाज या सामाजिक संरचना या सामाजिक व्यवस्था का विश्लेषण या अध्ययन करने के लिए यह आवश्यक है कि आंशिक सामाजिक संरचना (Partial Social Structure) या सामाजिक संरचना के भाग के प्रकार्यों (Functions) का अध्ययन किया जाए। अतः संपूर्ण अध्ययन सामाजिक संरचना (Social Structure ) और उसके प्रकार्यों (Functions) पर केंद्रित रहता है। इसीलिए इसे संरचनात्मक प्रकार्यात्मक विश्लेषण कहते हैं। संरचनात्मक प्रकार्यात्मक विश्लेषण में दो प्रत्यय प्रमुख हैं-
(1) संरचना (Structure), और
(2) प्रकार्य (Function )
संरचना "परस्पर संबंधित संस्थाओं, ऐजेंसियों और सामाजिक प्रतिमानों तथा साथ ही समूह में प्रत्येक सदस्य द्वारा ग्रहण की गई स्थितियों और भूमिकाओं की विशिष्ट क्रमबद्धता (Particular Arrangement) को कहते हैं। संरचना की परिभाषा से स्पष्ट है कि अपेक्षाकृत स्थाई प्रतिमानों की व्यवस्था बताया है। अतः संरचना एक क्रमबद्धता या व्यवस्था ( Order or System) है जो समाज के विभिन्न अंगों के बीच पाई जाती है। व्यवस्था या क्रमबद्धता स्वयं इकाइयाँ न होकर केवल उनके बीच पाई जाने वाली क्रमबद्धता है। इसलिए सामाजिक संरचना अमूर्त होती है। सामाजिक संरचना देखी नहीं जा सकती, उसे तो इकाइयों या अंगों या भागों के प्रकार्यों (Functions) के द्वारा समझा जा सकता है।
इसीलिए संरचनात्मम-प्रकार्यात्मक विश्लेषण को केवल प्रकार्यात्मक विश्लेषण (Functional Analysis) ही कहते हैं, क्योंकि संरचना को प्रकार्यों के संदर्भ में ही समझा या अध्ययन किया जा सकता है। प्रकार्य इस विवेचन का केंद्रीय प्रत्यय है। कोजर तथा रोजनबर्ग ने प्रकार्य को "किसी सामाजिक क्रिया का परिणाम कहा है जो किसी एक संरचना अथवा उसके निर्माणक भाग के अनुकूलन या सामंजस्य कर्मे सहायक होता है। रेडक्लिफ-ब्राउन ने प्रकार्य की परिभाषा करते हुए लिखा है- “प्रकार्य वह योग है जो एक अंश या भागी की क्रिया, जिसका कि वह भाग है. के लिए रकती है।" इससे स्पष्ट हैं कि प्रकार्य क्रिया नहीं है, अपितु क्रिया से उत्पन्न परिणाम है। प्रकार्यात्मक विश्लेषण में अब प्रकार्य का ही अध्ययन नहीं होता, अपितु अकार्य (Dysfunction) का भी अध्ययन होता है। मर्टन ने इस प्रत्यय को विकसित किया है और इसके अध्ययन पर बल दिया है। इसी प्रकार उसने प्रकार्य के दोनों रूपों अंतर्निहित (Latent) और प्रत्यक्ष (Manifest) के अध्ययन पर बल दिया है।
प्रकार्यात्मक विश्लेषण की कुछ प्रचलित मान्यताएँ (Prevailing Postulates) हैं, जिन्हें पहले से ही मानकर या आधार बनाकर अध्ययन किया जाता है, अब हम उन पर प्रकाश डालेंगे।
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