संस्कृति का संरचना प्रकार्यवादी सिद्धांत - Structure of Culture Functionalist Theory

 संस्कृति का संरचना प्रकार्यवादी सिद्धांत - Structure of Culture Functionalist Theory


रेडक्लिफ ब्राउन ऐसे मानवशास्त्री थे, जो काल्पनिक या अनुमानित अध्ययन के प्रति रुचि नहीं रखते थे, लेकिन उन्होंने कर्तव्य और निष्ठा के साथ अंडमान निवासियों की पौराणिक कथाओं, संस्कार, उत्सव, रीति-रिवाजों को लिपिबद्ध किया। अंडमान द्वीपवासियों के ऊपर लिखित उनका शोध प्रबंध करीब 15 साल तक अप्रकाशित रहा। इस लंबी अवधि में उन्होंने दुर्खीम तथा मार्शल मास के लेखन एवं सिद्धांत का अध्ययन किया। कुछ दिनों के पश्चात वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अर्थ एवं प्रकार का अध्ययन ऐतिहासिक पुनर्निर्माण की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है। जब अंडमान द्वीपवासियों के ऊपर लिखित उनकी पुस्तक सन 1922 ई. में प्रकाशित हुई, तब उसमें अर्थ एवं प्रकार की झलक दिखाई पड़ी। उनकी पुस्तक में अंडमान द्वीपवासियों की पौराणिक कथाओं तथा रीति-रिवाजों का केवल विवरण नहीं था, वरन विश्लेषण भी प्रस्तुत किया गया था।

रेडक्लिफ ब्राउन के अनुसार सामाजिक संरचना व्यक्तियों की संस्थागत भूमिका तथा संबंधों की व्यवस्था है। इस व्यवस्था की निरंतरता, संरचनात्मक निरंतरता के रूप में जानी जाती है। व्यक्ति तथा समूह परिवर्तनशील है, इनसे सामाजिक संरचना का निर्माण होता है। एक व्यक्ति या समूह के स्थान पर दूसरे व्यक्ति या समूह उत्पन्न हो जाते हैं। अतः सामाजिक निरंतरता गतिशील है। इस संरचनात्मक निरंतरता में व्यक्ति तथा समूह में परिवर्तन होता है, लेकिन स्वरूप अपरिवर्तित या अपरिवर्तनशील रहता है। ब्राउन ने सामाजिक निरंतरता की बात अंडमान द्वीपवासियों के सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषता के संदर्भ में प्रस्तुत की थी। उनके अनुसार अंडमान द्विपवासी तथा उनकी संस्थाएं परिवर्तित हो सकती हैं, लेकिन उनके समाज में पीढ़ियों से चलने वाली पौराणिक कथाएं, रीति-रिवाज, कला, विश्वास, गीत, उत्सव, संस्कार, सामाजिक मूल्य इत्यादि सदा गतिमान रहेंगे एवं समय के साथ इनके स्वरूप में कुछ परिवर्तन अवश्य हो सकता है।