संबंधित साहित्य का अध्ययन - study related literature
संबंधित साहित्य का अध्ययन - study related literature
शोध का यह दूसरा महत्वपूर्ण चरण है। इसके अंतर्गत शोधकर्ता के लिए यह आवश्यक है कि वह चुने गए शोध विषय के संबंध में उन सभी विचारों, पद्धतियों, कठिनाइयों एवं निष्कर्षों का अध्ययन करें जो उससे पूर्व के अध्ययनकर्ताओं द्वारा किए गए हो। शोध चाहे सामाजिक क्षेत्र से संबंधित हो तथा भौतिक विज्ञानों से, यह कार्य सभी शोधकर्ताओं के लिए बहुत आवश्यक होता है। साधारणतया शोधकर्ता अपने अध्ययन विषय से संबंधित साहित्य का पुनरावलोकन किए बिना ही शोध की रूपरेखा को तैयार कर लेते हैं तथा अध्ययन क्षेत्र का निर्धारण करने में अति शीघ्रता प्रदर्शित करते हैं। इसके फलस्वरूप शोध की संपूर्ण प्रक्रिया दोषपूर्ण हो जाती है तथा अक्सर शोध कार्य बीच में ही रुक जाता है। शोध से संबंधित साहित्य का आरंभ में ही अध्ययन कर लेने से शोधकर्ता के लिए न केवल एक दिशा मिल जाती है
बल्कि वह उन उपागमों से भी परिचित हो जाता है जिनकी सहायता से शोध कार्य को व्यवस्थित रूप से पूरा किया जा सके। शोध से संबंधित साहित्य अनेक प्रकार के प्रलेखों, लेखों, पत्रों, पुस्तकों तथा प्रतिवेदनों से प्राप्त हो सकता है। पी.वी. यंग का कथन है कि शोध विषय से संबंधित साहित्य का अध्ययन करने से अध्ययनकर्ता को अनेक लाभ होते हैं- सर्वप्रथम, इससे अध्ययनकर्ता को ऐसी अंतर्दृष्टि मिल जाती है जिससे वह सही प्रश्न करके उत्तरदाताओं से सूचनाएं प्राप्त कर सके। दूसरा, साहित्य के अध्ययन से अनेक ऐसी पद्धतियों और प्रविधियों का ज्ञान हो जाता है जिन पर हो सकता है कि अध्ययनकर्ता ने पहले विचार ना किया हो। तीसरा, इससे अवधारणाओं को समझने में सहायता में मिलती हैं तथा अनेक मान्यताओं का सत्यापन करने के तरीकों का ज्ञान हो जाता है। अंत में, साहित्य के अध्ययन से तथ्यों की आवश्यक पुनरावृति की संभावना कम हो जाती है तथा अध्ययन कहीं अधिक व्यवस्थित बन जाता है।
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