पूरक इतिहास : चौथा चरण - Supplemental History: Fourth Phase
पूरक इतिहास : चौथा चरण - Supplemental History: Fourth Phase
स्त्री इतिहास ने इस चरण में स्त्रियों को एक समूह या एक वर्ग में देखना शुरू किया। भारत के कई सामाजिक, किसान, श्रम, आदिवासी और आजादी के आंदोलन में स्त्रियों के इतिहास को वापस लिखने वाले कई काम सामने आए। निम्नलिखित प्रमुख कार्य ऐसे हैं, जिन्होंने स्त्रियों को इतिहास निर्माता बताया
नीरा देसाई :वूमन इन मॉडर्न इंडिया (1957)
बी. आर. नंदा : फ्रॉम पर्दा टू मार्डनिटी (1962)
मनमोहन कौर : वूमन इन इंडियाज फ्रीडम स्ट्रगल (1985)
कुमारी जयवर्द्धने : फेमिनिज्म एंड नेशनलिज्म इन द थर्ड वर्ल्ड (1986)
उर्मिला पंवार और मीनाक्षी मून : आम्हीही इतिहास घडवाल 1989 (वी आल्सो मेडहिस्ट्री 2008)
स्त्री शक्ति संगठन : वी वर मेंकिग हिस्ट्री : लाईफ स्टोरीज ऑफ वूमन इन द तेलगांना पीपुल्स स्ट्रगल
राधा कुमार : हिस्ट्री ऑफ डूइंग (1993)
गेर्लडिन कार्बेस : वूमन इन मॉडर्न इंडिया (1996)
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