तकनीकी तथा कम्प्यूटर शिक्षा - technical and computer education
तकनीकी तथा कम्प्यूटर शिक्षा - technical and computer education
वर्तमान युग विज्ञान व तकनीकी का युग है। किसी देश की समृद्धि कल्याण, सुरक्षा एवं वैभव मुख्यतः विज्ञान व तकनीकी के विकास पर निर्भर करती है। इसके लिए उस राष्ट्र में अच्छी तकनीकी शिक्षा का होना आवश्यक है।
भारत में आधुनिक तकनीकी शिक्षा की शुरूआत ब्रिटिश शासन काल में हुई थी। स्वतंत्रता कि पश्चात् तकनीकी का तीव्र गति से विकास हुआ है. फिर भी ये पर्याप्त नहीं है। तकनीकी शिक्षा में प्रवेश इसके पाठ्यक्रम व शिक्षण की समस्याएं इसके विकास में बाधक हैं। वर्तमान में रोजगार भी एक बड़ी समस्या है। कई छात्र तकनीकी शिक्षा प्राप्त बेरोजगार है। विभिन्न शिक्षा नीतियों में तकनीकी शिक्षा पर विशेष बल दिया है।
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1968) में तकनीकी शिक्षा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968 में तकनीकी शिक्षा पर विशेष रूप से कुछ नहीं कहा गया इसमें विज्ञान शिक्षा तथा कृषि तथा उद्योगों के लिए शिक्षा की बात कहीं गई। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति बढ़ाने के लिए विज्ञान की शिक्षा तथा अनुसंधान को उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रत्येक राज्य में कम से कम एक कृषि विश्वविद्यालय खोलना चाहिए विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के अभिन्न अंग के रूप में उद्योगों से सम्बन्धित व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-1986 में तकनीकी शिक्षा तकनीकी एवं कंप्यूटर को पुनर्गठित सम्मावित परिवर्तनों ज्ञान की तीव्रता से बढ़ोत्तरी तथा विज्ञान व तकनीकी की विराट उन्नति को ध्यान में रखकर करना चाहिए। क्योंकि आज कंप्यूटर महत्वपूर्ण एवं सर्वत्र उपयोगी साधन बन गया है।
इसलिए कंप्यूटरों का प्रारम्भिक ज्ञान तथा उनके उपयोग का प्रशिक्षण व्यवसायिक शिक्षा का एक अंग होना चाहिए। महिलाओं, आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों तथा विकलांगों के लाभ के लिए तकनीकी शिक्षा के उपयुक्त औपचारिक तथा अनौपचारिक कार्यक्रम बनाये जायेंगे।
• तकनीकी शिक्षा पर व्यय अधिक होता है, इसलिए लागत प्रभावशीलता के लिए तथा श्रेष्ठता बढ़ाने के लिए उपाय किये जायेंगे।
• तकनीकी शिक्षा के प्रसार के लिए प्रोफेशनल संघों को प्रोत्साहित एवं तैयार किया जायेगा।
3. कार्यान्वयन कार्यक्रम (1986)-राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए मानव संसाधन विभाग ने कार्यान्वयन कार्यक्रम तैयार किया इसे तकनीकी शिक्षा की निम्नलिखित व्यवस्था की गई।
• अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (AICTE) को मजबूत किया जाये।
• राज्यों में तकनीकी शिक्षा बोर्डों तथा निदेशालयों को मजबूत किया जाये।
• तकनीकी संसाधन सूचना प्रणाली का कंप्यूटरीकरण किया जायेगा।
• तकनीकी तथा प्रबन्ध संस्थाओं को स्वायन्तता दी जायेगी।
• उच्च तकनीकी संस्थाओं में अन्तरक्षेत्रीय गतिशीलता बढ़ाई जायेगी।
• तकनीकी शिक्षा में सतत शिक्षा तथा दूर अधिगम को प्रोत्साहित किया जायेगा।
• कंप्यूटर शिक्षा का विस्तार किया जायेगा।
4. कार्यान्वयन कार्यक्रम 1992 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 की पाँच वर्ष बाद 1992 में उसकी समीक्षा की गई तथा प्राप्त सफलताओं असफलताओं तथा प्रतिक्रिया के आधार पर इसमें कई संशोधन किये गये। इसके बाद संशोधित नीति बनाई गई ओर इसके कार्यान्वयन के लिए एक कार्यक्रम बनाया जिससे कार्यान्वयन कार्यक्रम 1992 के नाम से जाना जाता है उसमें तकनीकी एवं कंप्यूटर शिक्षा में निम्न बातों को सम्मलित किया गया
• मानको एवं स्तरों के बनाये रखने के लिए प्रमाणन पुनरीक्षण व मूल्यांकन को सुनिश्चित करने के लिए ओर अधिक भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद को मजबूत किया जायेगा।
• तकनीकी जनशक्ति की उपलब्धता व मांग की सम्यक जानकारी के लिए समुचित डॉटा बेस विकसित किया जायेगा।
• अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (AICTE) के द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए न्यूनतम सम्पर्क कालांश, कंप्यूटर शिक्षण तथा नई तकनीकी सम्बन्धी मानक बनाए जायेंगे।
• कंप्यूटरों की सहायता से शिक्षा देने को बढ़ावा दिया जायेगा तथा शिक्षा संस्थाओं में कंप्यूटरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी।
• विभिन्न विषयों में कंप्यूटरों के उपयोग पर अलग से एक प्रश्न पत्र प्रारम्भ करने की दिशा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) पहल करेगा।
वार्तालाप में शामिल हों