समाजमिति तकनीक की प्रविधियाँ - Techniques of sociometric technique

समाजमिति तकनीक की प्रविधियाँ - Techniques of sociometric technique


1. सोशियोग्राम (Sociogram)


2. सामाजिक माप मैट्रिक्स (Sociometric Matrices )


3. समाजमितीय सूचकांक (Sociometric Index)


4. गेस-हू- टेकनीक (Guess who Technic ) 


5. सामाजिक दूरी स्केल (Social Distance Scale)


1. सोशियोग्राम (Sociogram) सोशियोग्राम में समूह के सदस्यों द्वारा एक-दूसरे के प्रति किये गये पसन्दों का एक आलेख या सादे कागज पर चित्र बनाकर दिखाया जाता है। शोधकर्ता ऐसे प्रश्नों से आरम्भ करता है जैसे प्रत्येक सदस्य से यह पूछा जाता है कि आप किसके साथ कार्य करना सर्वाधिक पसन्द करेंगें? अपनी पहली, दूसरी तथा तीसरी पसन्द बताइए।" यदि समूह में लड़के तथा लड़कियों दोनो हैं तो लड़कों का चिन्ह ‘त्रिकोण' (∆) और लड़कियों का वृत्त' (0) हो सकता है। पसन्द का एक दिशा सूचक तीर से प्रदर्शित कर सकते हैं और आपसी चयन को दोनों दिशाओं की ओर इंगित करते हुए त (←→) से प्रदर्शित किया जा सकता है। जो सदस्य सबसे अधिक लोगों के द्वारा चुने जाते हैं उन्हें 'तारा' (Stars) कहा जाता है। जो सदस्य दूसरे के द्वारा नहीं चुने जाते हैं उन्हें 'आइसोलेट्स' कहा जाता है। समूह के सदस्यों द्वारा एक-दूसरे को चुनकर बनाए गये छोटे समूह को 'क्लिक' कहा जाता है।

सोशियोग्राम के निर्माण में दूसरे चरण में तालिका बनायी जाती है। तालिका में छात्र का नाम तथा उसकी क्रम संख्या लिखी जाती है। पहले तीन कालमों में विद्यार्थी की अपनी पसन्द / चयन क्रम भरी जाती है। 


सोशियोग्राम समूह के सम्बन्धों का आकृति चित्र प्रस्तुत किया जाता है। इसके निर्माण में निम्न प्रक्रिया अपनायी जाती है।


1. 'स्टार्स' के नाम सोशियोग्राम के मध्य में रखा जाता है। लड़को के चिन्ह त्रिकोण में तथा लड़कियों को वृत्त में रखा जाता है।


2. 'आइसोलेट्स' जिन्हें बहुत कम चुना गया, उन्हें सोशियोग्राम के बाहरी क्षेत्र में रखिए


3. ज्यादा अंक प्राप्त करने वालों को 'स्टार्स' के पास रखा जाता है।


4. पूरी रेखा से पहले चयन को तथा खण्डित रेखा दूसरे चयन का तथा बिन्दु डैश चिन्ह तीसरे चयन को दर्शाते हैं।


2. वरण तालिका- इस विधि में एक ऐसी तालिका तैयार की जाती है जिसमें समूह के सदस्यों की संख्या के आधार पर एन x एन वर्गों वाली सारणी तैयार हो जाती है। तालिका के बायीं ओर पंक्ति के पहले एक सदस्य का नाम या संकेत नाम लिखा जाता है और तालिका के ऊपरी सिरे पर प्रत्येक कॉलम के ऊपर पंक्ति वाले क्रम में व्यक्तियों के नाम लिख लिए जाते हैं। इस तालिका में उस पंक्ति के व्यक्ति के वर्णों को धन और अस्वीकृतियों को ऋण के चिन्हों से व्यक्त किया जाता है। वह जिसको स्वीकार करता है उसकी पंक्ति में ऋण का चिन्ह बना दिया जाता है।


कालम योग व्यक्ति द्वारा किए गए वर्णों की संख्या के सूचक होते हैं। यह स्वतः स्पष्ट है कि इस तालिका में बाय के ऊपर कोने से नीचे के दाहिने कौने के बीच वाले वृत्त बिल्कुल खाली छूट जाते हैं

क्योंकिकि समाजमिति में किसी सदस्य को स्वंय को स्वीकृति या अस्वीकृति करने की सुविधा नहीं होती। इस तालिका के आधार पर व्यक्तियों के वरणोंज्ञका उपयोग कर सदस्यों को कोटि क्रम में प्रदर्शित किया जा सकता है इससे अधिक उपादेयता इस विधि को नहीं है, जब तक कि इन वरणों की संख्या का किसी अन्य सांख्यिकीय विधि से विश्लेषण न किया जाए।


3- समाजमितिक वरण परिच्छेदिका विश्लेषण- इस तकनीक को जेनिंग्स 1943 ने विकसित किया है। इस तकनीक में वरणों का विश्लेषण करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की वरण स्थिति को छह भागों में विभक्त किया जाता है। इस तकनीक का उपयोग तभी हो पाता है जब प्रति सदस्य को समाजमितिक वरण करने के लिए यह सुविधा दी गई हो कि वह जितने लोगों को चाहे प्रासंगिक क्रिया के लिए स्वीकार या अस्वीकार करें।

इसमें प्रत्येक सदस्य के लिए छह कालमों का निर्माण किया जाता है। पहले में व्यक्ति द्वारा किए गए धनात्मक वरणों की संख्या, दूसरे कालम में उसके द्वारा प्राप्त धनात्मक वरणों की संख्या, तीसरे कालम में उसके धनात्मक परस्पर वरण, चौथे में उसके द्वारा वयक्त अस्वीकृतियों की संख्या, पांचवें में उसके द्वारा प्राप्त अस्वीकृतियों की संख्या और अंतिम कॉलम में परस्पर ऋणात्मक वरणों की संख्या दी जाती है। स्वतः यह स्पष्ट है कि प्रथम तीन कालमों में व्यक्ति के वरण संरूप और अंतिम तीन कॉलमों में उसकी अस्वीकृति संरूप को प्रस्तुत किया जाता है। प्रत्येक सदस्य के वरण और अस्वीकृति संरूप को समाजमितिक परिच्छेदिका का नाम दिया जाता है। इसके आधार पर समूह के साथ व्यक्ति के संबंध की कुछ अंश तक संख्यात्मक जानकारी प्राप्त होती है।


5. अंतर्वैयक्तिक विशेषताओं के सूचकांक : समाजमिति प्रदत्तों की कुछ विशेषताओं को लेकर अनेक प्रकार के सूचकांकों की गणना की जा सकती है.

इन सूचकांकों को विभिन्न प्रकार के वर्गों में रखा जा सकता है, एक प्रकार के सूचकांक वे हैं जिनसे उन समूह इकाई की अनेक विशेषताओं के बारे में संख्यात्मक सूचकांक ज्ञात किये जाते हैं, कुछ सूचकांक समूह के व्यक्तियों की पृथक विशेषताओं को ज्ञात करने के लिए निकाले जाते हैं. बहुत से सूचकांक व्यक्ति की अन्तरक्रिया के परिमाण की जानकारी करते हैं. इन तीनों प्रकारों में बहुत से सूचकांक ऐसे है जिनकी गणना तभी की जा सकती है जब समाजमिति प्रक्रिया में व्यक्ति को मापदंडीय क्रिया के लिए असीमित संख्या में व्यक्तियों को स्वीकृति और अस्वीकृति करने की सुविधा प्राप्त हो. दूसरी ओर कुछ सूचकांक ऐसे है जिनकी गणना सिमित संख्या में स्वीकृति अस्वीकृति की स्थिति में ही संभव है इन सुच्कंको के सम्बन्ध में दूसरी महत्त्वपूर्ण बात यह की कुछ में स्विकृति अस्वीकृति की आवृत्ति और संख्या अंकगणितीय प्रक्रिया के माध्य से सूचकांक ज्ञात किये जाते हैं किन्तु अनेक सूचकांकों में समज्मितिक विशेषताओं का परिमानीय करण करने के लिए मनमाने ढंग से मापदंड बना लिया जाता है।