तत्कालीन बौद्धिक पृष्ठभूमि - then intellectual background

तत्कालीन बौद्धिक पृष्ठभूमि - then intellectual background


मार्क्स के विचारों के प्रेरणा स्रोतों के संबंध में यह लोकप्रिय मत है कि उन्होंने तीन स्त्रोतों से अपने विचारों से अपने विचारों को विकसित किया


1. जर्मन विचारवाद एवं विशेष रूप से फ्रेडरिक हीगल के विचारों को मार्क्स ने ग्रहण कर उन्हें रूपांतरित किया। अनेक विद्वान यह कहते हैं कि यदि हीगल नहीं होते तब मार्क्स भी नहीं होते। कार्ल मार्क्स ने द्वंद्वात्मकता की धारणा को हीगल से अपनाया। उन्होंने इस धारणा का प्रयोग भैतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में किया। इसलिए कहा कि हीगल सर के बल खड़े थे। हमने उन्हें पैरों के बल खड़ा कर दिया है।


2. दूसरी प्रेरणा मार्क्स की फ्रांसीसी समाजवादी परंपरा थी। मार्क्स फ्रांस में आकर एवं फ्रांसीसी विचारों के प्रभाव में ही समाजवादी हुए। संभवतः सेंट साइमन से उन्होंने समाजवाद की धारणा को अपना लिया।


3. तीसरी प्रेरणा मार्क्स की ब्रिटिश राजनैतिक अर्थशास्त्र की थी जिसमें उन्होंने एडम स्मिथ एवं डेविड रिकार्डो के विचारों को पर्याप्त महत्त्व दिया।


व्यापक रूप से मार्क्स के बौद्धिक विकास में ये प्रभाव सबसे महत्वपूर्ण थे। वास्तव में मार्क्स ने बहुत पढ़ा एवं ईसाइया बर्लिन के शब्दों में इन विचारों के समन्वय एवं पुनर्व्याख्या से अपने सैद्धांतिक निष्कर्ष दिए। यह कहना सही है कि न तो मार्क्स आसमान से टपके थे और न ही उनके विचार आकस्मिक थे। मार्क्स यूरोप की बौद्धिक परंपरा की निरंतरता में ही विकसित हुए। स्वयं अपने विचारों को नए प्रमाणों एवं नई परिस्थितियों के आलोक में उन्होंने बार-बार बदला। उपरोक्त गंभीर प्रभावों के अतिरिक्त भी वे अनेक स्रोतों से प्रभावित हुए। मार्क्स ने भौतिकवाद की धारणा अपने मित्र फायरबाक से अपनाई थी। मार्क्स यूरोप में उन्नीसवीं शताब्दी और उसके पहले भी प्रचलित प्रगति की धारणा से प्रभावित थे। यह प्रगति अनेक विद्वानों की दृष्टि में शांतिपूर्ण एवं अनेक विचारों में संघर्षपूर्ण थी। प्रगति के विचार देने वाले विद्वान थे लाइबनीज, लेसिंग, इमानुअल काम्र, हीगल इत्यादि। स्वयं मार्क्स ने कहा था कि प्रगति का यह रथ संघर्ष के पथ पर ही अग्रसर होता है यूरोप में अलगाव की धारणा भी बहुत प्रचलित थी,

फ्रांसीसी दार्शनिक रूसों ने इस स्थिति का विस्तार से वर्णन अपनी पुस्तक सेकेंड डिसकोर्स में किया है। हीगल ने इस शब्दावली का इस्तेमाल किया एवं इसके प्रेरणा स्रार्तो एवं परिणामों को विचारों के क्षेत्रों में खोजा। स्कीलर ने कहा कि आधुनिक श्रमविभाजन मानव के जीवन को प्रासद बना देता है। मार्क्स ने अलगाव की चर्चा की।


यूरोप में मार्क्स से पहले मानव के संपूर्ण विकास की धारणा प्रचलित थी। मार्क्स इससे प्रभावित हुए उनकी कामना थी कि एक ऐसा समाज होगा जिसमें मानव अपनी तमाम क्षमताओं का विकास कर • सकेगा एवं मानव की जीवन सुखी होगा। यह विचार मूलतः ज्ञानोदय का विचार था। यह फ्रांसीसी, ब्रिटिश एवं जर्मन ज्ञानोदय का एक समान विचार था यूरोप के बौद्धिक विकास में समाज की संपूर्णता की धारणा अर्थात् समस्त समाज एवं सामाजिक घटनाओं को एक संपूर्णता में देखा जाए, प्रभावशाली था, यह इतिहास को युगों में बाँटकर देखता था। जार्ज फ्रेडरिक हीगल इस विचार के प्रमुख प्रणेता थे उन्होंने ऐतिहासिक निर्धारणवाद भी कहा जाता है। मार्क्स ऐतिहासिक निर्धारणवाद भी कहा जाता है। मार्क्स ने समाज को संपूर्णता में देखा एवं समस्त ने पक्षों को एक अविभाज्य संपूर्णता में परखा।