तत्कालीन बौद्धिक पृष्ठभूमि - then intellectual background

तत्कालीन बौद्धिक पृष्ठभूमि - then intellectual background


टालकट पारसन्स ने बहुत अधिक लिखा। आर. के. मर्टन ने लिखा है कि पारसन्स सिद्धांत की दृष्टि से सिस्टम बिल्डर थे। मैक्स ब्लैक ने 1960 के दशक में ही एक पुस्तक का संपादन (टालकट पारसंस) शीर्षक से किया, जिसमें उन्होंने पारसन्स के बौद्धिक विकास की समीक्षा की। पारसन्स आरंभ में एक चिकित्सक बनना चाहते थे। जीव विज्ञान की चर्चाओं से और विशेष रूप से एल.जे. हेंडरसन की चर्चा में उन्होंने अंतर्निहित व्यवस्था के विचार को विकसित किया।


पारसन्स ने संभवतः संयुक्त राज्य अमेरिका में जो मनोवैज्ञानिक समाजशास्त्र एवं सामाजिक अंतर्क्रियाबाद की लंबी परंपरा थी. उसके कारण और अपने छात्र जीवन में जर्मनी में प्रवास के कारण और जर्मन क्रियावाद की प्रवृत्ति के कारण सामाजिक क्रिया को समाज का आधार मानकर चर्चा की। संयुक्त राज्य अमेरिका की जो संरचना थी एवं द्वितीय विश्वयुद्ध के पहले जो परिस्थितियाँ थीं, संभवतः उसके प्रभाव से भी उन्होंने सामाजिक क्रिया की धारणा को केंद्रीय माना एवं इसे जीवनपर्यंत छोड़ा नहीं।


सामाजिक क्रिया की वेबर की धारणा बहुत अंशों में मनोवैज्ञानिक आयामों से मुक्त है। संभवतः इस कारण मैक्स ब्लैक ने कहा पारसन्स की व्याख्या मनोवैज्ञानिक अधिक है और समाजशास्त्रीय कम है। यह मनोविज्ञान सिगमण्ड फ्रायड का मनोविज्ञान नहीं है। यह गेस्टाल्टवादी मनोवैज्ञानिकों जैसे कोहलर और कोफका का प्रभाव है। यह दृष्टिकोण मानता है कि व्यक्ति और समूह अपनी क्रिया में आंतरिक मानसिक स्थिति को प्रतिरूपित करता है। यह फ्रायड के समान अवचेतन की बात एवं लिबिडो अर्थात् वासना के दमन की बात नहीं करता है।


पारसन्स ने पहले विलफ्रेडो परेटो के संबंध में फ्रांस में सुना और पढ़ा। वह उनके अनुरूप थे। 1930 के दशक में एल. जे. हेन्डरसन ने पैरेटो के संबंध में एक बड़ा परिसंवाद आयोजित किया। इस परिसंवाद में पारसन्स थे। पारसन्स ने पैरेटो की धारण संतुलन को अपना लिया।

यूरोप एवं अमेरिका में बड़ा करीबी संपर्क था। इनकी बौद्धिक धाराएँ अलग थी। अमेरिका में यूरोप से वही अपनाया गया, जो उसके मिजाज के अनुकूल था। 


पारसन्स मैक्स वेबर से प्रभावित थे। अर्थशास्त्र में अपनी चर्चाओं के समय पारसन्स ने वेबर के अर्थशास्त्रीय विचारों को पढ़ा था। अपनी पुस्तक स्ट्रक्चर ऑफ सोशल एक्शन में उन्होंने वेबर, दुर्खाइम, पैरेटो आदि पर एक-एक अलग अध्याय में टिप्पणी की। जार्ज रीजर ने कहा वेबर के समान पारसन्स जीवन भर कार्ल मार्क्स के विचारों के विरोधी बने रहे। इसका एक कारण यह था कि अमेरिकी व्यवस्था ने मार्क्स को पसंद नहीं किया। अमेरिका में मैक्स वेबर की लोकप्रियता का एक कारण यह रहा है। कि वेबर मार्क्स के विरोधी थे एवं वेबर ने उत्पादन के साधनों के साथ शक्ति को समान महत्व दिया।


वैचारिक दृष्टि से पारसन्स ने 1950 के बाद सामाजिक अंतर्क्रिया एवं सामाजिक क्रिया की दृष्टि को पृष्ठभूमि में डाल दिया। इसके आर्थिक और राजनैतिक की चर्चा हमने की है। बौद्धिक दृष्टि से संभवतः यह एमिल दुर्खाइम के विचारों का प्रभाव था। वेबर एवं दुर्खाइम समकालीन थे, परंतु उनमें कभी पटी नहीं। दुर्खाइम ने अपनी पत्रिका (एनी सोशियोलॉजिका( नें कभी भी वेबर को प्रकाशित नहीं किया इसलिए पारसन्स का सामाजिक क्रिया से सामाजिक संरचना में संक्रमण एक तरह से मैक्स वेबर को छोड़ कर एमिल दुर्खाइम को अपनाना था।