पर्यावरण का सैद्धांतिक उपागम - Theoretical Approach to Environment
पर्यावरण का सैद्धांतिक उपागम - Theoretical Approach to Environment
पर्यावरण मनोविज्ञान में इस समय तीन प्रमुख सैद्धान्तिक उपागम प्रचलित हैं-
1. अनुकूलन,
2. अवसर की संरचना तथा
3. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रतिमान ।
1 अनुकूलन यह उपागम पर्यावरण को उसकी भौतिक विशेषताओं के रूप में ग्रहण करता है और व्यक्ति को एक जैविक व मनोवैज्ञानिक प्राणी मानता है। इसका उद्देश्य पर्यावरण में विद्यमान खतरों को टालना होता है।
2 - अवसर- संरचना का उपागम पंर्यावरण के उदेश्य और देश काल से जुड़ी हुई विशेषताएँ, उसमें प्राप्त
अवसर तथा सुविधाओं पर बल देता है।
3 - सामाजिक सांस्कृतिक प्रतिमान पर्यावरण की समस्याएँ सामाजिक संरचना द्वारा उत्पन्न मानी जाती है और स्वयं पर्यावरण सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से परिभाषित एक व्यवस्था है। अन्तर्विनिमय का उपागम व्यक्ति को परिवेश में स्थापित करके विश्लेषित करता है तथा यह मानता है कि व्यक्ति और पर्यावरण एक-दूसरे को निरन्तर प्रभावित करते रहते हैं।
स्मरणीय है कि इन उपागमो के साथ कुछ विशेष प्रकार के मूल्य तथा अभिग्रह भी जुड़े हुए हैं और शोध की समस्याओं और विधियों का चयन उन्हीं पर निर्भर करता है।
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