निर्देशित शैक्षणिक वार्तालाप का सिद्धान्त - Theory of Guided Educational Conversation

 निर्देशित शैक्षणिक वार्तालाप का सिद्धान्त - Theory of Guided Educational Conversation


बोर्जी होमबर्ग ने अपना व्यावसायिक जीवन एक अंग्रेजी प्राध्यापक के रूप में प्रारम्भ किया। बाद में सन 1956 ई. में स्वीडन के हरमोंड्स पत्राचार शिक्षा संस्थान में कार्यभार ग्रहण करके वह दूर शिक्षा की ओर प्रवृति हुआ। सन 1965 ई. वह संस्था का निदेशक भी बने। उनके प्रयासों एवं अनुभवों को देखते हुए बाद में उन्हें पश्चिम जर्मनी के फर्न यूनिवर्सिटी हेगन में दूर शिक्षा के प्रोफेसर पद पर नियुक्त किया गया। इस दौरान बोर्जी होमबर्ग ने निर्देशित शैक्षणिक वार्तालाप के सिद्धान्त' को प्रतिपादित करके दूर शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान किया।


निर्देशित शैक्षणिक वार्तालाप के आधार दूर शिक्षा में निर्देशित शैक्षणिक वार्तालाप विधि का दृष्टिकोण निम्नलिखित स्वयंसिद्धियों पर आधारित है - 


i. शिक्षक एवं शिक्षार्थी के बीच व्यक्तिगत सम्बन्ध की अनुभूति अध्ययन आनंद एवं छात्र अभिप्रेरणा को प्रोत्साहित करती है।


ii. इस प्रकार की अनुभूतियों को दूर से ही सुविकसित स्वतः अनुदेशात्मक सामाग्री एवं उपयुक्त द्विमार्गी सम्प्रेषण के द्वारा तीव्रता प्रदान की जाती है।


iii.  बौद्धिक आनंद एवं अध्ययन के प्रति अभिप्रेरणा, अध्ययन के लक्ष्यों को प्राप्त करने तथा अध्ययन की उचित प्रक्रिया एवं विधि के प्रयोग में सहायक होते है। मित्रवत वार्तालाप की भाषा, वातावरण एवं परंपरा, करती है। 


IV. व्यक्तिगत सम्बन्धों जैसी अनुभूति विकसित करती हैं।


V. वार्तालाप के ढंग से प्रस्तुत किए गए संदेशों एवं निर्देशों को अपेक्षाकृत आसानी से समझा एवं याद किया जा सकता है।


VI. सुव्यवस्थित अध्ययन हेतु शिक्षण संगठन एवं छात्र दोनों के लिए कार्य नियोजन एवं निर्देशन आवश्यक होते हैं।