जनजातीय समस्याएं : मदिरापान - Tribal Problems : Alcoholism

जनजातीय समस्याएं : मदिरापान - Tribal Problems : Alcoholism

जनजातीय संस्कृति में मदिरा (शराब) का विशेष एवं महत्वपूर्ण स्थान है। वास्तव में प्रत्येक जनजातीय समुदाय के द्वारा उनके आस-पास के प्राकृतिक संसाधनों एवं वन उत्पादों विशेष प्रकार का स्थानीय पेय (स्वबंस सपुनमत) बनाया जाता है। जो व्यापक पैमाने पर उपयोग किया जाता है। वह जन्म, विवाह एवं मृत्यु जैसे महत्वपूर्ण संस्कारों में अनिवार्य हिस्सा एवं किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि का भी अभिन्न हिस्सा है परंतु जब स्थानीय पेय का स्थान देशी शराब (National wine) एवं अंग्रेजी शराब ने ले लिया है। यह मदिरापान, जनजातीय समुदाय की बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है। आज ज्यादातर जनजातियों में अत्याधिक शराब का सेवन शारीरिक कमियों एवं ऋणग्रस्तता का कारण तो है ही साथ ही यह वैवाहिक, पारिवारिक एवं सामाजिक विघटन का भी प्रमुख कारण है।