जनजातीय समस्याएं : भूमि हस्तांतरण - Tribal Problems (Land Alienation)

जनजातीय समस्याएं : भूमि हस्तांतरण - Tribal Problems (Land Alienation)

नवीनतम आँकड़ों के अनुसार जनजातीय जनसंख्या का लगभग 88 प्रतिशत भाग कृषक है। जनजातियों का अपनी भूमि से बहुत भावनात्मक लगाव रहता है। जीवनयापन के लिए कृषी ही एक ऐसा साधन है जिस पर ये लोग सदियों से निर्भर हैं। अनुसूचित क्षेत्रों व अनुसूचित जनजाति आयोग की रिपार्ट में इन स्थितियों का वर्णन स्पष्ट रूप से किया गया है।


भूमि हस्तांतरण जैसी समस्या के मूल में पहुँचने से पूर्व सामान्य स्थितियों का विवरण देना अनुचित न होगा। संचार व्यवस्था में विस्तार होने के कारण समस्त जनजातीय क्षेत्र बाहरी लोगों के लिए खुल गया। ये बाहरी वर्ग इन क्षेत्रों में अपने-अपने उद्देश्यों व स्वार्थों के साथ प्रवेश कर गया। इनमें से भूमि अधिग्रहण करने वाले शक्तिशाली लोगों ने जनजातियों को सबसे अधिक परेशान किया।


भूमि अधिग्रहणके कारण धन की कमी भूमि हस्तांतरण के मुख्य कारणों में से एक है। जब से ये जनजातियां सभ्य समाज तथा इसकी वित्त संस्थाओं के संपर्क में आयीं, धन की कमी के कारण उनकी भूमि का हस्तांतरण बढ़ता गया। विवाह, उत्सवों, कपड़ों, मदिरा तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए जनजातीय लोगों को सदैव धन की आवश्यकता रहती है। इस प्रकार भूमि हस्तांतरण से साहूकारों तथा दुकानदारों के ऋण एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साहूकार इन्हें किसी भी समय, किसी भी उद्देश्य के लिए, बिना सशर्त बगैर जमानत के ऋण देने को तैयार रहते हैं। उपरोक्त तथ्यों को ध्यान रखते हुए ये लोग बढ़ी हुई ब्याज दरों पर भी साहूकारों से ही ऋण लेना अधिक सुरक्षित समझते हैं।