जनजातीय समस्याएं : निर्धनता - Tribal Problems : Poverty
जनजातीय समस्याएं : निर्धनता - Tribal Problems : Poverty
निःसन्देह दीर्घकालीन व्यापक गरीबी भारत के औपनिवेशिक इतिहास में शुरू से ही चली आ रही में है। अपनी आर्थिक समस्याएं हल करने और सर्वतोमुखी विकास करने के हमारे प्रयास हमारी पंचवर्षीय योजनाओं के साथ शरू हुए। उन्होंने कई मामलों में देश का कायाकल्प भी किया, जैसे ठोस औद्योगीकरण, हरित क्रांति जिससे देश में आवश्यकता से अधिक खाद्यान्न पैदा होने लगा, औसत जीवनावधि में वृद्धि हुई मध्य समृद्धि में तेजी से वृद्धि हुई। जनजातीय लोगों में अफीम तथा अन्य नशीली वस्तुओं की लत भी एक गम्भीर स्वास्थ्य समस्या है। अरुणाचल प्रदेश की सिंहफो जनजाति इसका ज्वलंत उदाहण है। लगभग 150 वर्ष पूर्व इन लोगों की संख्या 40 हजार थी जो अब लगभग 1 हजार रह गयी है। जनजातियों को स्वास्थ्य शिक्षा देना आवश्यक है। अधिकतर जनजातियां अशिक्षित हैं, परंतु चलचित्रों तथा वीडियो केसैटों की सहायता से इन्हें स्वास्थ्य तथा सफाई के मूल सिद्धांतों से अवगत करना चाहिए।
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