जनजातीय समस्याएं : अस्थायी कृषि - Tribal Problems: Shifting Cultivation
जनजातीय समस्याएं : अस्थायी कृषि - Tribal Problems: Shifting Cultivation
भारतीय जनजातियों में अस्थायी कृषि का प्रचलन बहुत पुराना है। अस्थायी कृषि का अर्थ है कि कुछ समय तक एक भूमि पर कृषि करना तथा फिर उसे खाली छोड़ देना। इसके अंतर्गत जंगली ढलानों की सफाई, गिरे हुए पेड़ों तथा पत्तों को जलाना तथा फिर राख से ढकी भूमि पर बीज को बोने जैसे कार्य होते हैं। इसके बाद सब कुछ प्रकृति पर निर्भर होता है। यह कार्य अधिकतर ग्रीष्म ऋतु से पूर्व प्रारंभ होता है अस्थायी कृषि उपरोक्त उत्तर-पूर्व के जनजातीय क्षेत्रों में बहुत प्रचलित रही है। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश व उड़ीसा की बैगा जनजाति भी यह कृषि करती रही है।
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