साहित्य पुनरावलोकन के प्रकार एवं चरण - Type and Step of Literature Review

 साहित्य पुनरावलोकन के प्रकार एवं चरण - Type and Step of Literature Review


एक शोध कार्य में साहित्य का पुनरावलोकन दो प्रकार से किया जा सकता है:


विषय के आधार पर इसके अंतर्गत कुंजी शब्दों से संबंधित कार्यों की तलाश के बजाय यह देखा जाता है कि संबंधित विषय पर केन्द्रित होकर क्या-क्या लिखा गया है। कौन-कौन पक्षों पर केन्द्रित होकर उसकी किस प्रकार की व्याख्या प्रस्तुत की गई है। इस आधार पर वर्तमान शोध में केन्द्रित क्षेत्र के अतिरिक्त और अन्य महत्वपूर्ण पक्षों की जानकारी प्राप्त हो जाती है जिसको लेना वर्तमान शोध हेतु और भी प्रासंगिक बनता है।


कुंजी शब्द के आधार पर इसके अंतर्गत अपने शोध विषय के कुंजी शब्द या मुख्य शब्द की पहचान करके उससे संबंधित पुस्तकों, लेखों की विभिन्न पुस्तकालयों अथवा इन्टरनेट पर साहित्य के खोज की जाती है।

कुंजी शब्द या मुख्य शब्द से संबंधित विभिन्न किए गए पूर्व के अध्ययन कार्य का अवलोकन और उनका चुनाव किया जाता है. और कुंजी शब्दों पर मिलने वाले उपयोगी साहित्यों का पुनरावलोकन किया जाता है।


साहित्य का पुनरावलोकन करने के लिए मुख्य चरण होते है-


● शोध समस्या की पहचान एवं चयन: समाज में घटने वाली ऐसी घटना या प्रभाव जो अपने संज्ञान में वह समस्या को निरूपित करता हो, उसे शोध के रूप में पहचान कर अपने शोध समस्या के लिए चयन किया जाना चाहिए ताकि उसे शोध के माध्यम से उसे समझा जाए या उसका निवारण किया जाए।


● समस्या से संबन्धित साहित्य की खोज शोध कार्य को करने के लिए समस्या को शोध का शीर्षक बनाया जाता है एवं उससे संबन्धित पूर्व में किसी अन्य विद्वानों या शोधकर्ताओं के द्वारा, किसी प्रकार का शोध किया गया है कि नहीं. उसकी खोज इंटरनेट, लेख व पुस्तकों में की जानी चाहिए। जहाँ पर शोध के समस्या से संबन्धित तथ्य या उसके आस-पास तथ्यों की जानकारी प्राप्ति होती है। यह साहित्य हमारे शोध को दिशा प्रदान करते है।


● शोध समस्या (शीर्षक) के मुख्य धारणाओं के आधार पर उपयोगी व अनुपयोगी साहित्य का चयन करना : शोध शीर्षक के मुख्य धारणाओं के आधार पर ही लेखों व पुस्तकों से उपयोगी लेखों या पूर्व के किए शोध प्रबंधों या शोध कार्यों को छांट कर उसका गहन अध्ययन किया जाता है।


● साहित्य के अध्ययन में कार्यों पर ध्यान केन्द्रित करना : साहित्य के अध्ययन में किए जाने वाले शोध कार्यों के उद्देश्य क्या हैं तथा वह क्या प्रश्न कर रहे हैं

इन पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है। किए गए शोध कार्यों के गहन अध्ययन से हमारे शोध के लिए या शोध में उपयोग करने के लिए सहायता मिल सकती है।


● शोध साहित्य के उद्देश्य व प्रविधि को लिखना: शोध साहित्यों के अध्ययन मात्र से ही कार्य नहीं होगा अपितु उस शोध साहित्य में मुख्य धारणाओं पर क्या उद्देश्य प्रश्न व प्रविधियों का प्रयोग किया गया है उसे भी लिखते रहना चाहिए। साहित्य कहाँ से और किस शोधकर्ता के द्वारा प्रकाशित किया गया है उसका भी लेखन किया जाना चाहिए।


● प्राप्त प्रविधियों को अपने शोध में मार्गदर्शन के रूप में अपनाना : पूर्व के शोध लेखों में प्रयुक्त प्रविधियों व उसमें विचार, अंतरदृष्टियों, नतीजों को लेकर तर्क पूर्ण सहित अपने शोध के 'व कार्य में स्थापित किया जाना चाहिए, जिससे साहित्य के अध्ययन द्वारा शोध को वैधानिक रास्ता प्राप्त होता है। तथ्यों या आँकड़ों को प्रविधियों के द्वारा प्राप्त करने से अर्थात प्राप्त किए गए आंकड़ें या तथ्य, वैध होते है। तब जब इनको प्राप्त करने के लिये पूर्व के शोध साहित्य के प्रविधियों का सहारा लिया गया हो।