सार्वभौमवाद बनाम विशिष्टतावाद - Universalism vs. Specificism

  सार्वभौमवाद बनाम विशिष्टतावाद - Universalism vs. Specificism


सार्वभौमवाद बनाम विशिष्टताबाद एक विन्यास प्रकारांतर है, जो उस भूमिका स्थिति को निरूपित करता है। जहाँ व्यक्ति की दुविधा संज्ञानात्मक बनाम संवेगात्मक मानकों के मूल्यांकन के संबंध में होती है। मानव व्यवहार के सार्वभौमवादी मानकों के पालन की भूमिका का एक बहुत ही अच्छा उदाहरण भूमिका निष्पादनों का है. जो पूरी तरह से कानून सम्मत मानदंडों और कानूनी स्वीकृति के अनुसार है। अगर कोई व्यक्ति व्यक्तिगत रिश्तेदारी या मित्रता के संबंधों पर ध्यान दिए बिना कानून के नियमों का पालन करे, तो वह सार्वभौमवादी भूमिका निष्पादन प्रणाली का उदाहरण कहा जाएगा। अगर कोई व्यक्ति केवल इसलिए कानूनी मानदंडों का उल्लधन करे कि संबद्ध व्यक्ति उसका रिश्तेदार या दोस्त है, तो यह कहा जाएगा कि उस समय विशिष्टतावादी तक कार्यरत थे। पारसन्स का कहना है कि ऐसे समाजों में जहाँ नौकरशाही औपचारिक संगठन और आधुनिक संस्थाओं की व्यापक भूमिका है वहाँ सार्वभौमवाद और विशिष्टतावाद के बीच दुविधा की स्थिति रोजमर्रा के जीवन में चुनाव के विषय बन गए है।