मूल्यपरक उन्मुखता - value orientation
मूल्यपरक उन्मुखता - value orientation
मूल्यपरक उन्मुखता के क्षेत्र के भी तीन भाग है ये हैं
• बोधपरक उन्मुखता - बोधपरक उन्मुखता का संबंध निर्णय की बैधता से है।
• विवेचनात्मक उन्मुखता - विवेचनात्मक उन्मुखता उसे कहते हैं जिनके द्वारा पात्रों के लिए यह संभव होता है कि वे वस्तुओं के प्रति संवेगात्मक अनुक्रिया, इसकी उपयुक्तता या संगति के बारे में निर्णय ले सकें.
• नैतिक उन्मुखता - नैतिक उन्मुखता वह है, जो (अपनी) वस्तुओं के प्रति पात्र या व्यक्ति की मूल्य प्रतिबद्धता की ओर संकेत करती है।
बाजार में सब्जी खरीदने वाली गृहिणी का उदाहरण गृहिणी की सेवन अभिप्रेरणात्मक उन्मुखता को स्पष्ट करता है.
लेकिन मूल्यपरक उन्मुखता के क्षेत्र में समाज की मूल्य व्यवस्था और सांस्कृतिक विन्यास आते हैं। पात्र व्यक्तिगत रूप से सांस्कृतिक विन्यास के संदर्भ में क्रिया करते हैं। उदाहरण के तौर पर परिवार में बेटे की भूमिका और प्रस्थिति समाज में निर्धारित कुछ प्रतिमानों से निर्देशित होती है। जैसे पितृसत्तात्मक परिवार मे बेटे की प्रस्थिति मातृसत्तापरक परिवार से भिन्न होती है। उसका व्यवहार उसके समाज के प्रतिमानों से निर्देशित होगा।
इस प्रकार अभिप्रेरणात्मक उन्मुखता में व्यक्ति की केवल अभिप्रेरणाएँ और मनोवैज्ञानिक पहलू ही शामिल होते हैं, जबकि मूल्यपरक उन्मुखता से पूर्ण सांस्कृतिक प्रणाली जुड़ी होती है। व्यक्ति के व्यवहार में मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक दोनों परंपरा एक-दूसरे से जुड़े हुए है और एक-दूसरे पर निर्भर होती है।
पारसन्स के अनुसार अभिप्रेरणात्मक उन्मुखता और मूल्यपरक उन्मुखता के दो स्तर है, जो भूमिका और भूमिका अपेक्षाओं के व्यवहारपरक और सांस्कृतिक पहलुओं को निर्धारित करते हैं।
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