प्रसंग-समूह की दृष्टिगोचरता - Visibility of role-performance
प्रसंग-समूह की दृष्टिगोचरता - Visibility of role-performance
प्रसंग-समूह और प्रसंग-व्यक्ति दो अलग-अलग अवधारणाएँ है। जिस व्यक्ति की भूमिका प्रारूप मानकर अनुकरण किया जाता है। उसे प्रसंग व्यक्ति कहा जाता है। व्यक्ति किसी की भूमिका का अनुसरण तभी कर सकता है, जब दूसरे की भूमिका उसे दृष्टिगोचर हो।
प्रसंग समूह के सदस्यों की भूमिका का दृष्टिगोचर होना आवश्यक है। जब उसकी भूमिका को दूसरे लोग देखेंगे तभी प्रसंग-समूह की ओर झुकेंगे । अनेक सामाजिक कारणों से दूसरों की भूमिका दृष्टिगोचर नहीं हो पातीं, जैसे- प्राचीन भारत में मंदिर में पुजारी की भूमिका को कष्ट सामाजिक कारणों से, अछूत व्यक्ति नहीं देख सकता था। अनेक ऐसे समूह होते हैं। जो अ-सदस्य को अपनी कार्यकारिता देखने की अनुमति नहीं देते हैं।
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