पश्चिमीकरण एवं शिक्षा - westernization and education

पश्चिमीकरण एवं शिक्षा - westernization and education


पश्चिमीकरण की प्रक्रिया का प्रारंभ ब्रिटिश शाशन काल में हुआ। भारत की आझादी के उपरांत भी पश्चिमीकरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही। सामाजिक संस्था, मूल्य, विचार, सामाजिक संरचना आदि में परिवर्तन होता है। पश्चिमीकरण की प्रक्रिया में पश्चिमी देशों के लोगो के पोशाख, खान-पान आचार विचार साहित्य, विज्ञान-तकनीकी शिक्षा, मूल्यों आदि का स्वीकार किया जाता है। राजनैतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संपर्क के कारण पश्चिमीकरण की प्रक्रिया गतिमान होती है। भारत की पश्चिमीकरण की प्रक्रिया में इंग्लैंड, फ्रांस, पोर्तुगाल आदि पश्चिमी देशों का अधिक प्रभाव दिखता है। पश्चिमीकरण का एक सकारात्मक बदलाव सामाजिक सुधार में हुआ। जाती प्रथा की कट्टरता, विवाह, स्त्रियों की स्थिति आदि में सुधार हुआ। वैज्ञानिकता, शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना, राष्ट्रीयता का उदय, सामाजिक एवं राजनैतिक नेतृत्व का विकास आदि पश्चिमीकरण प्रक्रिया का सकारात्मक प्रतिफल माना जा सकता है।

पश्चिमीकरण के कारण जातीय भेदभाव का उन्मूलन करके समानता मूल्यों का स्वीकार किया गया है। आंतरजातीय विवाह को मान्यता, बालविवाह पर प्रतिबंध, पुनर्विवाह की मान्यता, विवाह विस्छेद को मान्यता आदि बदलाव आए है। पश्चिमीकरण का प्रभाव परिवार की घटती सदस्य संख्या एवं संयुक्तता पर भी हुआ। स्त्रियों के कार्यक्षेत्र में वृद्धि होने लगी। सती प्रथा, बालविवाह, देवदासी प्रथा, छुआछुत, मानव बलि प्रथा, पर्दा पद्धति, कर्मकांड, अंधविश्वास आदि बुराईयों का प्रतिरोध होने लगा। सामाजिक एवं धार्मिक सुधारवादी आंदोलन के कारण समाज में आमूलचूल परिवर्तन होने लगा। विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं का उदय एवं विकास हुआ। पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव के कारण आधुनिक एवं सुधारवादी समाज के निर्माण का प्रारंभ हुआ। विभिन्न जाती, धर्म, पंथ, भाषा एवं क्षेत्र की विलगता को भुलाकर राष्ट्रभक्ति एवं राजनैतिक जागृति होने लगी। पश्चिमी साहित्य के प्रभाव से भारतीय साहित्य भी अछुता नहीं रहा। पश्चिमीकरण के द्वारा प्रभावित शिक्षा के द्वारा स्वतंत्रता, उदारवाद, विज्ञानवाद, समानता, धर्मनिरपेक्षता आदि के आधार पर विचारों, आदर्शों एवं मूल्यों में बदलाव आया। पश्चिमीकरण का प्रभाव आर्थिक क्षेत्र में भी दिखने लगा। परंपरागत एवं कुटीर उद्योग की जगह विशाल उद्योग ने लेना प्रारंभ किया। संचार साधनों के कारण राष्ट्रिय एवं अंतरराष्ट्रिय व्यापार में वृद्धि हुई। पश्चिमीकरण का सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव मानवी मूल्यों का विकास माना जा सकता है।