वर्ग का उदय क्यों होता है - Why does class arise?

वर्ग का उदय क्यों होता है - Why does class arise?


मार्क्स ने कहा वर्ग एक ऐतिहासिक कोटि है अर्थात् वर्गों का उदय इतिहास के एक विशेष चरण में होता है एवं इतिहास के युगानुसार अर्थात् उत्पादन की शैली के अनुसार वर्गों का चरित्र बदल जाता है। अलग-अलग समाजों में वर्गों का उदय अलग-अलग समय में हुआ है। आदिवासी समाज में स्थानों पर अभी भी नहीं हैं। मार्क्स के अनुसार जब प्रकृति से संघर्ष एवं सहयोग के कारण एक समाज में संसाधन अधिक बढ़ जाते हैं एवं तत्काल उपभोग के बाद भी अधिशेष बचता है, तब इस अधिशेष के लिए समाज में संघर्ष होता है। संघर्ष में वे विजय प्राप्त करते हैं, जिनके पास वह अधिशेष होता है। थोड़े से लोग प्रकृति के साधनों एवं मानव निर्मित साधनों पर नियंत्रण कर लेते हैं और शेष लोगों को भी नियंत्रित कर लेते हैं। मानव समाज में मार्क्स के अनुसार वर्ग विभाजन का आरंभ गुलाम समाज अथवा प्राचीन समाज में हुआ। एशियाई समाजों में न तो निजी संपत्ति की व्यवस्था थी और न ही वर्ग विभाजन था। सार्वजानिक संगठन थे एवं सामूहिक समुदाय जैसी राजनैतिक संस्था थी।


मार्क्स ने कहा हक समाज में वर्ग विभाजन का आरंभ होने पर वर्गीय संस्थाएँ जैसे राज्य, सरकार और कानून भी विकसित होते हैं। वास्तव में इन संस्थाओं का उपयोग शासक वर्ग के वर्चस्व को बनाए रखने में होता है। समाज में वर्ग विभाजन का आरंभ होने पर अथवा इसके साथ ही साथ परिवार और इसके आधार के रूप में निजी संपत्ति का उदय होता है। समाज में वर्गों के उदय से पहले धर्म प्रचलित था।

वर्ग समाज में धर्म शासक वर्ग का सहायक हो जाता है। मार्क्स ने कहा धर्म आत्माहीनों की आत्मा है, यह बेसहारों का सहारा है. यह हृदयहीनों का हृदय है, यह जनता की अफीम है। धर्म जनता की चेतना को विकसित होने से रोकता है. धर्म वास्तविक जीवन से मानव का अलगाव कर देता है। समाज में वर्गों का उदय होने से सभी संगठन एवं संस्थाएँ भी एक वर्गीय स्वरूप अपना लेती हैं।