स्वतन्त्रता के बाद में नारी/महिला शिक्षा - Women's Education in Post-Independence
स्वतन्त्रता के बाद में नारी/महिला शिक्षा - Women's Education in Post-Independence
स्वतंत्रता के पश्चात् महिलाओं के सामाजिक एवं शैक्षिक स्तर में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया है। भारतीय संविधान में पुरुषों तथा स्त्रियों को समान दर्जा दिया गया है। संविधान में स्त्री शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है। आज महिला कोई भी कोर्स कर सकता है और कोई भी नौकरी कर सकती है यहाँ तक की सेवा में भी महिलायें जा रही है ओर युद्ध वाहक विमान चला रही है जल एवं थल सेना में भी महिला जा रही है। स्वतंत्रता के पश्चात् स्त्री शिक्षा के मार्ग में आने वाली बाधाओं को जानने एवं उनके समाधान हेतु अनेक समितियों तथा आयोगों का गठन किया गया। 1958 में गठित दुर्गाबाई देशमुख समिति तथा 1962 में गठित हंसा मेहता समिति के द्वारा महिला शिक्षा हेतु अनेक सुझाव प्रस्तुत किये गये थे। कोठारी आयोग ने भी महिला शिक्षा हेतु अनेक सुझाव प्रदान किये 1986 की नई शिक्षा नीति में भी स्त्री शिक्षा के प्रोत्साहन हेतु कई क्रान्तिकारी परिवर्तन लाये जाने का संकल्प दोहराया गया।
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