स्त्रियों का जीवन कथ्य: तीसरा चरण - Women's Life Story: The Third Stage

स्त्रियों का जीवन कथ्य: तीसरा चरण - Women's Life Story: The Third Stage


आजादी के बाद भारत में अब तक उपेक्षित बहादुर नायिकाओं के इतिहास लेखन पर जोर दिया गया और अनेक जीवनियाँ सामने आई। इनमें रजिया सुल्तान, चाँद बीबी, जीजा बाई, झाँसी की रानी इत्यादि प्रमुख थी। तथापि ये जीवनियाँ उन्हीं स्त्रियों की थी जो रानियाँ, नायिकाएँ, राष्ट्रीय आंदोलन में भागीदार थी। इतिहास के पन्नों से आम औरतें अभी भी गायब थी। स्वामी माधवानंद और रमेशचंद्र मजूमदार की ग्रेट वूमॅन ऑफ इंडिया' (1953) इसी तरह का एक उदाहरण है। अब तक इतिहास से पृथक रही स्त्रियों के इतिहास ने मुख्यधारा इतिहास द्वारा बनाई संरचनाओं और ढ़ाँचों को चुनौती नहीं दी। मुख्यधारा इतिहास अतीत की राजनीति के रूप में इतिहास के भाव से प्रभावित रहा। इस समय मुख्यधारा या तो राजाओं, वंशों, युद्धों का इतिहास थी या राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने वाले नायकों का।

कुछ महिलाओं को बिना मुख्यधारा को क्षति पहुँचाए इतिहास के खाँचे में स्थान दे दिया गया। 


इस स्तर पर इतिहास ने इन पूर्वधारणाओं को चुनौती नहीं दी कि कौन-सी घटना इतिहास में शामिल करने लायक है? क्यों युद्ध, योद्धा और उनकी जीत इतिहास में महत्वपूर्ण घटनाओं की तरह मानी जाती है? भोजन उत्पादन, सिलाई, प्रजनन एवं पालन-पोषण, परिवार की देखभाल जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ इतिहास में स्थान क्यों नहीं बना पाती हैं? बल्कि इतिहास इस स्तर पर सत्ताशील एवं युद्ध करने वाले पुरूषों की भाँति युद्ध करने वाली स्त्रियों की प्रशंसा कर पितृसत्तात्मक पूर्वधारणाओं को मज़बूत कर रहा था। झांसी की रानी इसका एक उदाहरण है।