विश्व की राजनितिक विचारधाराएं - world political ideology

विश्व की राजनितिक विचारधाराएं - world political ideology


प्राचीन काल से वर्तमान काल तक एकसत्ताक राजेशाही, महाजनशाही, सरदारशाही, सरंजामशाही, हुकुमशाही, साम्यवादी अध्यक्षीय शासनप्रनाली. लोकशाही आदि प्रकार की शासनप्रनाली विश्व के विभिन्न देशों में पायी जाती है। जिसके संदर्भ जानकारी निम्नवत है - 


● एकसत्ताक राजसत्ता (Autocracy):


एकसत्ताक शासनव्यवस्था में एक व्यक्ति के पास सत्ता का केंद्रीकरण होता है। वह व्यक्ति राजा, अनियंत्रित शासक या हुकुमशहा हो सकता है। प्राचीन काल में अधिकतर राष्ट्रों में एकाधिकारशाही या एकसत्ताक राजसत्ता संचालित थी। वर्तमान में विविध देशों में एकसत्ताक शासनव्यवस्था या एकाधिकारशाही अस्तित्व में है।


जिस व्यक्ति पर शासन व्यवस्था चलाने की जिम्मेदारी होती है। उसके लिए उत्तम शिक्षा की व्यवस्था की जाती है। सामान्य जनता की शिक्षा की ओर दुर्लक्ष किया जाता है। एकाधिकार शासन प्रणाली में राजा की आज्ञा का पालन करना जनता का कर्तव्य होता है। जनता के द्वारा किये गए विरोध को राजसत्ता द्वारा नष्ट किया जाता है। एकसत्ताक शासन प्रणाली में राज्य के ध्येयानुसार शिक्षा प्रणाली का क्रियान्वयन किया जाता है। सत्ता के अनुकूल जनता की विचारप्रणाली विकसित की जाती है। राजा की आज्ञा का पालन करना जनता का कर्तव्य होता है। राजाज्ञा का विरोध करने वाले व्यक्तियों को दंड दिया जाता है। एकसत्ताक शासनप्रनाली द्वारा लिए गए निर्णयों के संदर्भ में जनमत तैयार करना शिक्षा संस्थानों का प्रधान दाईत्व होता है। राज्य के निर्णयों का प्रचार प्रसार करना शिक्षकों की जबाबदेही होती है। कार्यरत शासनप्रनाली के अनुसार नागरिकों को शिक्षा दी जाती है।


● महाजन सत्ता (Aristocracy):


एकाधिकारशाही के समान ही महाजनशाही सत्ता का स्वरूप होता है। एकाधिकारशाही शासनप्रनाली में सत्ता किसी एक व्यक्ति के पास केंद्रित होती है। महाजनशाही शासनप्रनाली में सत्ता अल्पसंख्य समूह के पास केंद्रित होती है। सत्ता का विभाजन समाज के चुनिंदा लोगो के पास रहती है। ग्रीक देश में यह सत्ता समाज के महान लोगो के पास रहती है। इस कारण उक्त शासनप्रनाली को महाजन सत्ता' कहा जाता है। श्रेष्ठतम जन अर्थात महाजन के द्वारा सत्ता का संचालन किया जाता है। महाजन पद कुलीन होता है। पूंजीवादी काल में पूंजीवादियों द्वारा महाजनो का उदय होता है। साम्यवाद में साम्यवादी विचारों के अल्पसंख्यक सत्ता का संचालन करते है। यह अल्पसंख्यक वर्गों का उदय कुलीनता एवं धन के आधार पर होता है।


महाजन सत्ता शिक्षा को अधिक प्रभावित करती है। प्राथमिक शिक्षा के अलावा उच्च शिक्षा पर महाजन एवं धनिक वर्गों के अधीनस्थ चलती है। बहुजन वर्ग एवं उच्च वर्गियों के लिए अलग-अलग शिक्षण पद्धति का प्रचलन था।

उच्च वर्गियो को सत्ता संचालन अर्थात राजनीती की शिक्षा दी जाती है। राजनीती विज्ञान, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासन संचालन, आर्थिक विकास आदि का समावेश उच्च वर्गियों की शिक्षा में होता है। शिक्षा की सहायता से महाजनसत्ता की निरंतरता बनाये रखना शिक्षा का प्रधान उद्देश्य होता है।


● राजेशाही (Monarchy) :


प्राचीन काल में समाज के रक्षण के लिए जो युद्ध का नेतृत्व करता था वही नेता माना जाता है। वही नेतृत्वधारी व्यक्ति शांति काल में राजा कहलाता है। राज्य के सुयोग्य संचालन के लिए नियम बनाये गए जिसे '‘राजनीति विज्ञान' के नाम से जाना जाता है। राज्य का सुचारु संचालन कैसे किया जाए, जनता के साथ कैसे व्यवहार किया जाए, जनता के लिए कैसे सुविधा उपलब्ध किया जाए, राज्य का संरक्षण एवं विस्तार कैसे किया जाए. सिमालगत राज्यों के साथ कैसे व्यवहार किया जाए आदि के संदर्भ में शिक्षण राजनीति विज्ञान के द्वारा उपलब्ध कराया जाता। राजधर्म के साथ प्रजाधर्म के नियम भी राजनीति विज्ञान में सम्मिलित होते है। राजा के वंशज को राजा बनाने की व्यवस्था निर्माण की गई। The Divine Rights of King' इसप्रकार की कल्पना तत्कालीन समय में इंग्लंड में प्रचलित थी। भारत में भी राजा को ईश्वर का अवतार माना जाता था। बलशाली राजा का पुत्र बलशाली ही होगा ऐसा जनता का मानना था। वर्तमान में अविकसित देशों में राजेशाही शासनप्रनाली का अस्तिव दिखायी देता है।


● सरदारशाही (Oligarchy)


राजेशाही शासनप्रनाली में अस्थिरता निर्माण होने के कारण राजा को राजपद से हटाया जाता है। राज्य के कुछ कर्तबगार सरदार राज्य की सत्ता का संचालन करते है। उस शासनप्रनाली को 'सरदारशाही’ के नाम से जाना जाता है। कमकुवत राजा या राजपुत्र को सत्ता से हटाके कर्तबगार सरदार सत्ता का संचालन करते है। सरदारशाही सत्ता राजेशाही के समान वंशागत होती है। विविध सरदार अपनी प्रबलता के आधार पर सत्ता प्राप्त करते है।


● हुकुमशाही (Dictatorship) :


इटली की फॅसिज़म एवं जर्मनी की नाझिजम यह हुकुमशाही शासनप्रनाली के सर्वोत्तम उदहारण हैं। युद्धोत्तर स्थतियों का लाभ लेते हुए जर्मनी एवं इटली में क्रमशः हिटलर एवं मुसोलिनी ने हुकुमशाही शासनप्रनाली की स्थापना की। प्रथम विश्वयुद्ध के उपरांत इटली की आर्थिक स्थितियां ख़राब हुई। असंतोष, दंगल, संप आदि का प्रचलन बढ़कर अशांति की स्थिति निर्माण हुई। मुसोलिनी के नेतृत्व में फॅसिस्ट पक्ष ने नेतृत्व किया। राष्ट्रहित में कार्य करते हुए देश में शांति प्रस्थापित की। राष्ट्र के लिए मर मिटने के लिए फॅसिस्ट युवा तैयार हुए। फॅसिस्टवादियों की सहायता से मुसोलिनी ने अपना हुकुमशाही साम्राज्य स्थापित किया।


प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी का पराभव होने के उपरांत शस्त्र संधि हेतु व्हार्साय का तह किया गया। जर्मनी के उपर अपमानजनक शर्तें रखकर एक राष्ट्र के संदर्भ में अपमान किया गया। व्हर्साय की शस्त्रसंधी के विरुद्ध जनमत तयार करने का कार्य नाझी पक्ष की द्वारा किया गया। नाझी पक्ष हिटलर की नेतृत्व में इकट्ठा हुआ। नाझी का अर्थ NAtional SoZlalist- NAZI' है। 1934 में हिड्रेनबुर्ग के मृत्यु के उपरांत ॲडाल्फ़ हिटलर सर्वाधिकारी बना। जर्मन पार्लमेंट नष्ट कर हिटलर हुकुमशहा बना। ज्यू समाज को देशद्रोही करार देते हुए बड़े पैमाने पर मारा गया।


लोकतांत्रिक शासनप्रनाली नाममात्र रहीं। समाचार पत्र, मुद्रण यंत्रणा, कामगार संघटना आदि पर नियंत्रण प्रस्थापित किया। मुद्रण स्वातंत्र्य, सभा स्वातंत्र्य, भाषण स्वातंत्र्य आदि पर रोक लगा दी। विरोधियों को दंडित किया। शस्त्र निर्मिति एवं लष्करी शिक्षा पर बल दिया गया। राज्य विरोधी तत्वों को नष्ट किया गया। सत्ता के अनुकूल शिक्षा को प्रेषित किया गया।


● साम्यवाद (Communism):


झार की जुलमी राजसत्ता, किसानों एवं श्रमिकों की दयनीय आर्थिक स्थिति, कामगारों का असंतोष, राज्य कारभार के प्रति असमाधान एवं मार्क्स के विचारों प्रति आकर्षण आदि कारणों से रशिया में राज्यक्रांति हुई। रशिया में समाजवाद का विकास होने लगा। लेनिन के नेतृत्व में किसान एवं श्रमिको की सोवियत सरकार स्थापित की। सोवियत सरकार को किसान, श्रमिक एवं सामान्य जनता का सहयोग प्राप्त हुआ था। देश में कार्यरत सभी कारखाने सरकार के अधिकार में आ गए। कारखानों में श्रमिकों की सत्ता प्रस्थापित हुई। उद्योग प्रशासन में श्रमिकों की भागीदारी बढ़ी। किसानों को खेती उपलब्ध कराई गई। श्रमिक, किसान एवं सामान्य जनता की सुख-सुविधा की ओर ध्यान दिया गया। लेनिनने बोल्शेविक पक्ष (बहुमतवाला पक्ष) का नाम बदलाकर कम्युनिस्ट (साम्यवादी) पक्ष कर दिया। पूंजीवादी शासनप्रनाली नष्ट करने के लिए आमूलचूल बदलाव किया जाना जरूरी था जो लेनिन के नेतृत्व में किये गए। श्रमिक एवं किसानो की सत्ता निर्माण की गई। साम्यवादी शासनप्रनाली को हुकुमशाही शासनप्रनाली का स्वरूप प्राप्त हुआ।


साम्यवादी शासनप्रनाली में शिक्षा का स्वरुप मार्क्सवाद, साम्यवाद आदि पर आधारित था। श्रमिक, किसानों एवं सामान्य जनता के हितों की रक्षा के लिए शिक्षा का आयोजन नियोजन एवं क्रियान्वयन किया गया। शिक्षा के द्वारा मार्क्सवाद एवं साम्यवाद का प्रचार प्रसार किया गया। मार्क्सवाद एवं साम्यवाद का प्रभाव रशिया में नहीं पुरे विश्व में दिखाई देता है। कार्ल मार्क्स, फेड्रिक एंगेल्स, कार्ल कॉट्सकी, बी.आई.लेनिन, रोजा लक्जेमबर्ग, लियो ट्रॉट्स्की, जोशेफ़ स्टॅलिन, माओ त्से तुंग आदि विद्वानों का साम्यवाद के चितन में महत्वपूर्ण सहयोग है।


● लोकतंत्र (Democracy):


लोकतंत्रात्मक शासनप्रनाली यह विश्व की सर्वाधिक लोकप्रिय एवं आदर्श शासनप्रनाली मानी जाती है। लोकतंत्र को Democracy' कहते है।

Democracy' शब्द Demos people, kratos power से बना है। लोकतंत्र केवल शासनप्रनाली नहीं, यह एक जीवनप्रनाली है। परिवार, विद्यालय, सामाजिक संस्था एवं राजनितिक संस्था आदि में लोकतंत्रात्मक शासनप्रनाली का प्रयोग किया जाता है। जीवन के विभिन्न अंगो में लोकतंत्रात्मक पद्धति का प्रयोग किया जाता है। लोकतंत्र में सर्व सामान्य जनता के सर्वांगिक विकास पर बल दिया जाता है। लोकतंत्र में लिंग, जन्मस्थान, वंश, जाति, धर्म, पंथ, वर्ग, क्षेत्र आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। सभी मानव समान है, यह लोकतंत्र का मूलाधार है। सभी व्यक्तियों को अपनी क्षमता के अनुसार विकास के अवसर प्रदान किये जाते है। लोकतंत्र में सभी को स्वतंत्रता प्रदान की जाती है किन्तु सामाजिक जीवन की मर्यादाओं का पालन व्यक्तियों को करना होता है। जियो और जीने दो' इस तत्व का पालन व्यक्तियों द्वारा करना अपेक्षित है। न्याय, स्वातंत्र, समता, बंधुभाव आदि पर लोकतंत्र की आधारशिला है।


लोकतंत्र यह प्रधानता से शासनप्रनाली है। लोकतंत्रात्मक शासनप्रनाली में सत्ता का संचालन जनता के द्वारा नियुक्त प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। मतदान के द्वारा जनता अपने प्रतिनिधियों को विधिमंडल में चयनित करती है। बहुजनों के द्वारा चयनित प्रतिनिधि द्वारा कार्यकारी मंडल का निर्माण किया जाता है। कार्यकारी मंडल का प्रमुख राज्य में मुख्यमंत्री एवं देश में प्रधानमंत्री कहलाता है। लोकतंत्र यह अन्य शासनप्रनाली की तरह वांशिक नहीं है। किन्तु वांशिक परंपरा का असर लोकतंत्र में भी कम अधिक स्वरूप में दिखाई देता है। जनता ने लोकतंत्र को वंश परंपरागत न बनाते हुए सदाचारी, कर्तव्यतत्पर, ध्येयनिष्ठ समाजसेवी, भ्रष्टाचारमुक्त, गुन्हेगारिमुक्त प्रतिनिधियों का चयन करना चाहिए। लोकतांत्रिक शासनप्रनाली में भ्रष्टाचार, गुन्हेगारी प्रतिनिधित्व, जात-धर्म-क्षेत्र-भाषा-लिंग-पंथ को प्रधानता आदि अनिष्ट प्रथाओं का प्रचलन बढ़ा है। यह दोष लोकतंत्र की गुणों को ध्वस्त कर देते है। इस कारणवश लोकतंत्र परिणामकारक एवं सामान्य जनता के हितावह नहीं हो सकता है। लोकतंत्र के गुणों को बनाये रखने के लिए विद्वत्ता पात्रता, कर्तव्य तत्परता सेवानिष्टता एवं कार्यकुशलता आदि गुणों के आधार पर प्रतिनिधि की नियुक्ति की जानी चाहिए। विद्वान, कर्तव्य तत्पर, सेवानिष्ठ एवं कार्यकुशल प्रतिनिधि का चयन लोकसभा, विधानसभा, विधान परिषद एवं राज्यसभा में किया जाना चाहिए। राजनितिक दृष्टिसे लोकतंत्र के क्रियान्वयन में दोष होंगे किन्तु शिक्षा की दृष्टी से लोकतंत्र सर्वोत्तम है।