राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 (2) - National Policy of Education 1986
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 (2) - National Policy of Education 1986
इसके लिये २३ कार्यदल गठित किये गये जिनमें शिक्षा शास्त्री, विशेषज्ञ एवं केन्द्रीय व राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधि थे। इन कार्यदलों को निम्नलिखित विषय दिये गये -
1) शिक्षा प्रणाली को कियाशील बनाना।
(2) स्कूल शिक्षा की पाठ्यवस्तु तथा प्रक्रियाए।
3) नारी समानता के लिए शिक्षा
4) अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों की शिक्षा
5) अल्पसंख्यकों की शिक्षा
6) विकलांगों की शिक्षा
7) प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा
8) पूर्व बाल्यकाल परिचर्या तथा शिक्षा
9) अनौपचारिक शिक्षा व ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड सहित प्रारंभिक शिक्षा
10) माध्यमिक शिक्षा तथा नवोदय विद्यालय
11) शिक्षा का व्यावसायीकरण
12) उच्च शिक्षा
13) मुक्त विश्वविद्यालय तथा दूरस्थ अधिगम
14) तकनीकी तथा प्रबंध शिक्षा
15) अनुसंधान एवं विकास
16) शिक्षा में कम्प्यूटरों का उपयोग सहित संचार साधन तथा शैक्षिक तकनीकी।
17) उपाधियों को रोजगार से अलग करना तथा मानव शक्ति नियोजन।
18) सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य तथा भाषा नीति को लागू करना।
(19) खेल, शारीरिक शिक्षा तथा युवा
20) मूल्यांकन प्रकिया तथा परीक्षा सुधार।
21) अध्यापक तथा उनका प्रशिक्षण
22) शिक्षा का प्रबंध
23) ग्रामीण विश्वविद्यालय / संस्थान
कार्यान्वयन कार्यक्रम को 24 अध्यायों में विभाजित किया गया।
1) समानता हेतु शिक्षा:--
1) महिलाओं की समानता हेतु शिक्षा:
1. शिक्षा का उपयोग महिलाओं की स्थिति में बुनियादी परिवर्तन लाने के लिए किया जाए।
2. शिक्षा के व्यावसायीकरण का झुकाव महिलाओं के पक्ष में होगा।
3. पाठ्यक्रम तथा पठन सामग्री को पुनर्रचना की जाएगी।
4. महिलाओं से संबंधित अध्ययन को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
5. महिलाओं में निरखरता एवं शिक्षा की बाधाओं को दूर के लिए विशेष सहायता सेवाओं का प्रावधान किया जाएगा।
6. विभिन्न स्तरों पर तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष बल दिया जाएगा।
2) अनुसूचित जातियों की शिक्षा:
1. निर्धन परिवारों को प्रोत्साहन दिया जाए जिससे वो अपने बच्चों को १४ साल की उम्र तक नियमित रूप से स्कूल भेज सके।
2. व्यवसायों में लगे बालकों के लिए मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति योजना पहली कक्षा से शुरु की जाएगी।
3. अनुसूचित जाति के शिक्षकों की नियुक्ति पर विशेष ध्यान देना।
4. अनुसूचित जातियों की शिक्षा की प्रक्रिया में सम्मिलित करने हेतु लगातार नये तरीकों की खोज जारी रखना।
३) अनुसूचित जनजातियों की शिक्षा:
1. आदिवासी इलाकों में प्राथमिक विद्यालय खोलने के काम को प्राथमिकता दी जाएगी।
2. पाठ्यक्रम निर्माण तथा शिक्षण सामग्री तैयार करते समय आदिवासी भाषाओं का उपयोग किया जाए।
3. शिक्षित प्रतिभाशाली आदिवासी युवकों को प्रशिक्षण देकर शिक्षक बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
4) पिछड़े वर्ग की शिक्षा:
1. पिछड़े वर्गों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पहाड़ी व रेगिस्तानी जिलों में तथा दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में शिक्षा संस्थाएँ खोली जाएगी।
5) अल्पसंख्यको की शिक्षा:
1. अल्पसंख्यकों की शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया जाएगा।
2. संविधान में उन्हें अपनी भाषा और संस्कृति की हिफाजत करने तथा अपनी शैक्षिक संस्थाएं खोलने और चलाने के अधिकारों को भी शामिल किया जाए।
6 ) विकलांगों की शिक्षा:
1. विकलांगता अगर आंशिक या हाथ-पैर की है तो ऐसे बच्चों की पढ़ाई सामान्य बच्चों के साथ हो।
2. छात्रावास वाले स्कूलों को व्यवस्था की जाए।
3. व्यावसायिक प्रशिक्षण की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
4. शिक्षकों को विकलांग बालकों की शिक्षा के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
7) प्रौढ शिक्षा
1. प्रौढ शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा से जोड़ा जाएगा।
2. १५-३५ आयु वर्ग के निरखर लोगों को साक्षर करने के लिए साक्षरता कार्यक्रम चलाया जाएगा।
13. ग्रामीण क्षेत्रों में सतत् शिक्षा केंद्रों की स्थापना।
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