राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 (3) - National Policy of Education 1986

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 (3) - National Policy of Education 1986

विभिन्न पद्धतियों व माध्यमों का उपयोग करते हुए प्रौढ शिक्षा तथा निरंतर शिक्षा का एक व्यापक कार्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा।

जन शिक्षण और समूह शिक्षण के साधन के रूप में रेडियो, दूरदर्शन और फिल्मों का उपयोग

दूरस्थ शिक्षा के कार्यक्रम ।


पूर्व बाल्यकाल परिचर्या एवं शिक्षा:


1. एकीकृत बाल विकास सेवा के अन्तर्गत पूर्व विद्यालय शिक्षा को सुदृढ़ किया जाएगा। 


2. पूर्व बाल्यकाल शिक्षा योजना में स्वास्थ्य तथा पोषण पक्षों पर ध्यान दिया जायेगा।


3. स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से चलाए जा रहे बाल विकास के सभी कार्यक्रमों में एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।


4. पूर्व प्राथमिक स्कूलों में स्वास्थ्य व पोषण के पश्चों पर ध्यान दिया जायेगा।


5. प्रशिक्षण पक्ष को सुहृद किया जाएगा।


9) प्रारंभिक शिक्षा और ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड:


राष्ट्रीय शिक्षा नीति १९८६ में प्रारंभिक शिक्षा के सार्वजनीकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई। १४ वर्ष तक की आयु तक के बालकों के नामांकन तथा स्कूल में


बने रहने पर तथा शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार करने पर जोर दिया गया है।


1. क्षेत्र विशेष तथा जनसंख्या विशेष नियोजन कियान्वयन की व्यूह रचना का मुख्य केंद्र होगा।


2. विद्यालय उन्नति का राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम शुरु किया जाएगा।



3. नियोजन तथा क्रियान्वयन के सभी स्तर पर अध्यापकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।


4. ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड के अन्तर्गत स्कूलों में भवन चार्ट, खेल सामग्री आदि की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।


10) अनौपचारिक शिक्षा:


1. जो बालक शिक्षा छोड़ चुके है, जहाँ विद्यालय नहीं है, या ऐसी लड़कियों जो शिक्षा से वंचित है उनके लिए विशाल अनौपचारिक कार्यक्रम चलाया जाएगा।


2. अनौपचारिक शिक्षा केन्द्रों में आधुनिक तकनीक की सहायता ली जाएगी।


3. औपचारिक शिक्षा की तरह एक पाठ्यक्रम अनौपचारिक शिक्षा पद्धति के लिए भी तैयार किया जाएगा।


11) माध्यमिक शिक्षा:


1. माध्यमिक शिक्षा स्तर पर बालकों का इतिहास, बोध और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य का सही ढंग से ज्ञान दिया जा सकता है। 2. इस अवस्था में बालकों को अपने संवैधानिक दायित्व और नागरिकों के अधिकारों से परिचित हो जाना चाहिए।


13. जिन क्षेत्रों में माध्यमिक शिक्षा नहीं है वहाँ इसे सुलभ बनाया जाएगा और दूसरे क्षेत्रों में सुदृढीकरण पर बल दिया जाएगा।


12) गति निर्धारक विद्यालय


1. देश के विभिन्न भागों में एक निर्धारित डाँने के अनुसार गति निर्धारक विद्यालयों की स्थापना की जाएगी।


2. इनमें नयी पद्धतियों को अपनाने और प्रयोग करने की छूट रहेगी। 3. इन विद्यालयों का प्रमुख उद्देश्य समता और सामाजिक न्याय के साथ शिक्षा में उत्कृष्टता लानी होगी।


13) व्यावसायीकरण:


1. शिक्षा में व्यावसायीकरण को कियान्वित करना आवश्यक है इससे व्यक्तियों में रोजगार पाने की क्षमता बढेगी।


2. इसका उद्देश्य कई क्षेत्रों में चुने गए कार्यों में व्यवसाय सम्बन्धी प्रशिक्षण देना होगा।


3. स्वास्थ्य के क्षेत्र में नियोजन के लिए स्वास्थ्य संबंधी व्यावसायिक पाठयक्रम की आवश्यकता होगी।


4. व्यावसायिक पाठ्यचर्चाओं या संस्थाओं को स्थापित करने का दायित्व सरकार और सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के सेवा नियोजकों पर होगा।


14) उच्च शिक्षा:


1. उच्च शिक्षा संस्थानों को संसाधन उपलब्ध कराकर उनमें सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा।


2. महाविद्यालयों में विभागों को बढ़ाया जाएगा।


3. पाठ्यक्रमों को पुनर्गठित किया जाएगा।


4. अध्यापक प्रशिक्षण के लिए पुनश्चय तथा अभिनव पाठ्यक्रम चलाए जायेंगे।


5. विश्वविद्यालयों में अनुसंधान की सुविधा को समूह किया जाएगा।


6. विश्वविद्यालयों की कार्यक्षमता को बढ़ाया जाएगा।


15) मुक्त विश्वविद्यालय तथा दूरस्थ शिक्षा


1. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा।


2. पाठ्यक्रम को मोडयुलर प्रारूप पर बनाया जाएगा।


3. मुक्त विश्वविद्यालय के कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।


16 ) ग्रामीण विश्वविद्यालय


1. ग्रामीण विश्वविद्यालय के नए ढाँचे को सुदृढ़ किया जाएगा।


2. इसे महात्मा गांधी के शैक्षिक विचारों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।



3. महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा से सम्बन्धित संस्थाओं और कार्यक्रमों को सहायता दी जाएगी।


17) तकनीकी एवं प्रबंध शिक्षा:


1. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) को सुदृढ़ किया जाएगा। 2. राज्यों के तकनीकी शिक्षा बोडों तथा निदेशालयों को सुद्ध किया जाएगा।


3. तकनीकी संसाधन सूचना प्रणाली का कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा।


18) नवाचार, शोध और विकास


1. सभी उच्च तकनीकी संस्थाएँ शोध कार्य में पूर्ण तत्परता से करेंगी।


2. इसका उद्देश्य उच्च स्तर की जनशक्ति उपलब्ध कराना है जो शोध और विकास में उपयोगी सिद्ध हो सके।


19) प्रणाली को कार्यकारी बनाना


1. अध्यापकों को अधिक सुविधाओं के साथ ही उनकी अधिक जवाबदेही।


2. विद्यार्थियों के लिए सेवा में सुधार के साथ ही उनके सही आचरण पर बल


3. शिक्षा संस्थाओं को अधिक सुविधाएँ दिया जाना।


20) मूल्य शिक्षा


1. सामाजिक और नैतिक मूल्यों के विकास में शिक्षा को सशक्त माध्यम बनाने के लिए पाठ्यक्रम में परिवर्तन करना आवश्यक है।


2. शिक्षा द्वारा सार्वजनिक व शाश्वत मूल्यों का विकास किया जाए।


21) पुस्तकें और पुस्तकालय


1. समाज के सभी वर्गों को आसानी से पुस्तकें उपलब्ध कराने के प्रयास किए जायेंगे।


2. पुस्तकों की गुणात्मकता को सुधारने, पढ़ने की आदत का विकास करने और सृजनात्मक लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाये जायेंगे।


3. लेखकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ विदेशी पुस्तकों के भारतीय भाषाओं में अच्छे अनुवादकों को सहायता दी जायेगी।


4. बाल पुस्तकों के लिये विशेष ध्यान दिया जाएगा।


22) संचार माध्यम और शैक्षिक प्रौद्योगिकी


1. शैक्षिक प्रौद्योगिकी को सम्पन्न वर्गों के साथ अभाव वाले क्षेत्रों में पहुंचाया जाए।


2. शैक्षिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग उपयोगी जानकारी के लिए अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधारने के लिए तथा कला और संस्कृति के प्रति


जागरुकता के लिए किया जाएगा।


23) युवा वर्ग की भूमिका


1. शैक्षिक संस्थाओं के साथ-साथ उसके बाहर भी युवाओं को राष्ट्रीय और सामाजिक विकास के कार्य में सम्मिलित होने के अवसर दिए जायेंगे।।


2. राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर आदि योजनाओं में से किसी एक में भाग लेना बालकों के लिए अनिवार्य होगा।


3. राष्ट्रीय सेवाकर्मी योजना को सुदृढ़ किया जाएगा।


24) मूल्यांकन प्रक्रिया और परीक्षा में सुधार


1. अत्यधिक संयोग व आत्मनिष्ठता की संभावना को समाप्त करना।


2. रटने पर जीर को कम किया जायेगा।


3. परीक्षाओं के आयोजन में सुधार किया जायेगा।


4. सतत और संपूर्ण मूल्यांकन प्रक्रिया को अपनाया जायेगा।



25) शिक्षक


1. अध्यापकों की निर्माण और सृजन की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिले।


2. अध्यापकों को नये प्रयोग करने की स्वतंत्रता दी जाए।


3. अध्यापकों की भर्ती प्रणाली में परिवर्तन किया जाए।


4. शिक्षकों का वेतन व सेवा शर्तें उनके व्यावसायिक और सामाजिक दायित्व के अनुरूप हो।


26) अध्यापकों की शिक्षा


1. अध्यापकों के लिये शिक्षा की प्रणाली को बदला जाएगा।


2. अध्यापकों को शिक्षा के नवे कार्यक्रम में सतत शिक्षा की आवश्यकता पर बल देना होगा।


3. जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थाएँ स्थापित किए जायेंगे।


27) भाषा विकास शिक्षा:


1. आधुनिक भारतीय भाषाओं में पाठ्यसामग्री तथा संदर्भ पुस्तकें तैयार करायी जाएँगी।


2 अंग्रेजी भाषा को पुस्तकों का भारतीय भाषा में अनुवाद किया जाएगा।


3. हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में विकसित किया जाएगा।


28) शिक्षा का प्रबंध


1. केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के विभागों को सुदृढ़ किया जाएगा।


2. भारतीय शिक्षा सेवा गठित की जाएगी।।


3. विद्यालय संकुल विकसित किए जाएँगे।