राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 - National Policy of Education 1986
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 - National Policy of Education 1986
भारत में शिक्षा के स्तर में सुधार हेतु स्वतंत्रता के बाद अनेक प्रयास किये गए जनवरी 1985 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी को अध्यक्षता में एक नई शिक्षा नीति के निर्माण की घोषणा की गई। इस नीति में कुछ संशोधन कर 1986 में इसे स्वीकार कर लिया गया जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 कहा गया। इसके प्रारूप को
चार भागों में बाँटा गया है।
शिक्षा प्रारूप:- १ शिक्षा के किताबी ढाँचे को बदलना।
शिक्षा प्रारूप:- २ सामाजिक दायित्व का भाव पैदा करना।
शिक्षा प्रारूप:- ३ शिक्षा का इक्कीसवी सदी में पदार्पण तथा सामाजिक परिवर्तन की वाहिका बनाना।
शिवा प्रारूप:- ४ शिक्षा में तकनीकी परक दृष्टिकोण अपनाना।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उददेश्य
1) शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन की वाहिका बनाना।
2) वर्तमान शिक्षा की जनजागरण की शिक्षा के रूप में परिवर्तन करना।
(3) शिक्षा दुवारा व्यक्ति की सामाजिक आर्थिक उन्नति और सृजनशीलता बढ़ाना।
4) शिक्षा के द्वारा छात्रों का सर्वांगीण विकास करना।
(5) छात्रों में शिक्षा द्वारा वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और चरित्रात्मक मूल्यों का विकास करना।
6) छात्रों में काम के प्रति निष्ठा, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के प्रति वचनबद्धता देश की एकता एवं अखण्डता तथा अंतरराष्ट्रीय समाज को बढ़ावा देना।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूलतत्व - 1) राष्ट्रीय शिक्षा कार्यक्रम:
1. समूचे देश में १०+२+३ प्रणाली लागू की जाए। उसके ५ वर्षीय निम्न प्राथमिक, ३ वर्षीय उच्च प्राथमिक तथा २ वर्ष की हाई स्कूल की शिक्षा होगी।
2. राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में राष्ट्रीय शिक्षाक्रम का एक ढाँचा होगा।
2) पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा तथा प्राथमिक शिक्षा:
1. बाल शिक्षा कार्यक्रम को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
2. प्राथमिक शिक्षा में सार्वजनिक प्रवेश, १४ वर्ष की आयु तक ठहराव और शिक्षा में गुणात्मक वृद्धि की जाएगी।
3. प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी।
4. प्राथमिक विद्यालय में कम से कम दो अध्यापक होंगे जिनमें कम से कम एक महिला होगी।
5. विद्यालय छोडने वाले बालकों के लिए अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रम चलाया जाएगा।
3) अल्पसंख्यकों की शिक्षा:
अल्पसंख्यकों को शिक्षा के लिये सर्वसाधारण योजना तैयार की जाए।
4) स्त्री शिक्षा:
स्त्री शिक्षा पर जोर दिया जाएगा तथा उसे प्रोत्साहित किया जाएगा।
5) अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों की शिक्षा:
1. गरीब परिवारों के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रलोभन, अनौपचारिक शिक्षा तथा छात्रवृत्ति योजना निदानात्मक शिक्षण, शिक्षकों की नियुक्ति छात्रावास सुविधा आदि उपलब्ध कराई जाएगी।
6) विकलांगों की शिक्षा:
विकलांग व्यक्तियों को सामान्य समुदाय के साथ सहभागी बनाने में बल देना। उनके लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण छात्रावास तथा स्वैच्छिक प्रयत्नों पर विशेष बल दिया
जाएगा।
7 ) नवोदय विद्यालय:
तीव्रतर गति से आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने के लिए देश के प्रतिभावान बालकों के लिए प्रत्येक जिले में एक नवोदय विद्यालय स्थापित किया जाएगा। पिछडे वर्ग के विदयार्थियों को आगे बढ़ाने के लिये नवोदय विद्यालय की स्थापना की गई। नवोदय विद्यालय में पाठ्यक्रम केंद्रीय शिक्षा प्रणाली का होगा। 8) माध्यमिक शिक्षा का व्यावसायीकरण:
1. १९९० तक १०% तथा १९९५ तक २५% उच्च माध्यमिक विद्यार्थियों को व्यावसायिक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया जाएगा।
2. कार्यानुभव को शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर स्वीकार किया जाएगा।
9 ) उच्च शिक्षा एवं खुला विश्वविद्यालय:
1. उच्च शिक्षा कार्यक्रमों को पुनर्गठित किया जाएगा।
1. १९८५ में स्थापित 'इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय को समृद्ध किया जाएगा।
10 ) प्रौढ शिक्षा:
प्रौढ शिक्षा पर जोर दिया जाएगा। उनके लिए आवश्यकता व रुचि पर आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाने पर बल दिया जाएगा।
11) ग्रामीण विश्वविद्यालय:
महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित ग्रामीण विश्वविद्यालय का नया पैटर्न विकसित करने पर बल दिया जाएगा।
12) उपाधि रोजगार:
उपाधि को रोजगार से अलग करके देश के कुछ चयनित क्षेत्रों में राष्ट्रीय परीक्षण सेवा जैसी उपयुक्त प्रणाली विकसित की जायेगी।
13) प्रौद्योगिक एवं प्रबंध शिक्षा:
१ प्रौद्योगिक एवं प्रबंध शिक्षा पर जोर देना। वर्तमान व उभरती प्रौद्योगिकी में सतत शिक्षा को प्रोत्साहन देना। महिलाओं तथा विकलांगों के लाभ के लिए तकनीकी शिक्षा के अन्तर्गत औपचारिक एवम् अनौपचारिक कार्यक्रम चलाना
14) कम्प्यूटर साक्षरता:- कम्प्यूटर और उसके उपयोग को व्यावसायिक शिक्षा का अंग बनाया जाएगा। कम्प्यूटर साक्षरता के कार्यक्रम स्कूल स्तर पर बड़े पैमाने पर आयोजित किए जायेंगे।
15) शैक्षिक तकनीकी:- शिक्षा में शैक्षिक तकनीकी की सहायता ली जाएगी। सूचना प्रसारण, शिक्षक प्रशिक्षण, गुणात्मक वृद्धि, कला-संस्कृति के लिए जागरुकता, वांछित मूल्यों के विकास के क्षेत्रों पर विशेष बल दिया जाएगा।
16) मूल्यों की शिक्षा:- ऐसी मूल्यों को शिक्षा जो व्यक्तियों को समानता एवं एकता पर बल देकर अंधकार, धर्मान्धता, हिंसा, अन्धविश्वास और भाग्यवादिता के निराकरण पर बल दें।
17) पुस्तकों की गुणवत्ता:- पुस्तकालय की व्यवस्था और पुस्तकालयाध्यक्षों के स्तर पर अपेक्षित संशोधन एवं सुधार करने पर बत।
18) गणित एवं विज्ञान शिक्षण:- गणित शिक्षण को पुर्नगठित किया जाएगा। विज्ञान शिक्षा कार्यक्रम इस तरह से तैयार किए जायेंगे कि वह विद्यार्थियों के समस्या एवं निर्णय क्षमता पर बल दे
19) ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड:- ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड के अंतर्गत प्राथमिक शालाओं में २ कक्षाएँ, २ शिक्षक एक महिला अध्यापक, स्वच्छतागृह, शैश्चिक साहित्य इत्यादि प्राथमिक सुविधाएँ होनी चाहिए।
20) परीक्षा प्रणाली:- परीक्षा प्रणाली को प्रभावी बनाया जाएगा। अको के स्थान पर ब्रेड तथा माध्यमिक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली लागू की जाएगी। छात्रों को फेल करके ग्रेड प्रदान की जाएगी।
21) शिक्षक:
1. शिक्षकों की नयन विधि में योग्यता, वस्तुनिष्ठता तथा व्यावहारिक वांछनीयता को दृष्टिगत रखते हुये पुनर्गठित किया जाएगा।
2. शिक्षण मूल्यांकन प्रणाली खुली सहभागिता युक्त व प्रदत्त आधारित होगी।
3. शिक्षकों के लिए आचार संहिता निर्मित की जाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कार्यान्वयन कार्यक्रम
वार्तालाप में शामिल हों