जेंडर संवेदनशील शिक्षाशास्त्र, जेंडर की दृष्टि से विद्यालयी अनुभवों पर मनन एवं युक्तियाँ शिक्षकों की संवेदनशीलता(2) - Gender sensitive pedagogy, reflections and tips on school experiences from a gender perspective, teachers' sensitivity

जेंडर संवेदनशील शिक्षाशास्त्र, जेंडर की दृष्टि से विद्यालयी अनुभवों पर मनन एवं युक्तियाँ शिक्षकों की संवेदनशीलता (2)- Gender sensitive pedagogy, reflections and tips on school experiences from a gender perspective, teachers' sensitivity

विद्यालय प्रशासन एवं प्रबंधन :- शिक्षिकाओं को शिक्षकों के समान विद्यालय प्रशासन एवं प्रबंधन में उचित स्थान दिया जाना चाहिए। उन्हें विद्यालय से जुड़े किसी भी पक्ष के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान रूप से साझेदार बनाया जाना चाहिए। विद्यालय के किसी भी कार्यक्रम जैसे- वार्षिकोत्सव, संगोष्ठी, सेमीनार, कार्यशाला, भूतपूर्व छात्रों का सम्मलेन आदि के नियोजन एवं संगठन की जिम्मेदारी शिक्षिकाओं एवं शिक्षकों तथा बालिकाओं एवं बालकों को समान रूप से दी जानी चाहिए । विभिन्न विद्यालयी गतिविधियों के संचालन में जेंडर के आधार पर किसी भी प्रकार का भेद-भाव नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षक एवं शिक्षिकाओं के बीच कार्य भार का उचित रूप से विभाजन किया जाना चाहिए। कार्य की प्रकृति तथा उससे जुड़ी जेंडररुदियों के आधार पर शिक्षक एवं शिक्षिकाओं में भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए- संगोष्ठी के आयोजन के लिए कक्षा की सजावट या अतिथियों के स्वागत की जिम्मेदारी केवल शिक्षिकाओं एवं बालिकाओं को ही नहीं होनी चाहिए वरन शिक्षकों तथा बालकों को भी इसका हिस्सेदार बनाया जाना चाहिए।

वहीं दूसरी ओर संगोष्ठी के तकनीकी पक्षों में शिक्षिकाओं एवं बालिकाओं की भागीदारी भी तय की जानी चाहिए विद्यार्थी अभिशासन में बालिकाओं एवं बालकों दोनों को समान रूप से साझेदार बनाना चाहिए। इसके रूपरेखा के निर्धारण एवं क्रियान्वयन का दायित्व दोनों को समान रूप से दिया जाना चाहिए। बच्चों के प्रवेश एवं उस्थिति रिकॉर्ड, अनुशासन एवं उपलब्धि रिपोर्ट आदि तैयार करने की जिम्मेदारी शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को समान रूप से दी जानी चाहिए। इस प्रकार विद्यालय प्रशासन में शिक्षिका एवं बालिकाओं की साझेदारी तय कर विद्यालय व्यवस्था को जेंडर समावेशी बनाया जा सकता है।


शिक्षकों की भर्ती : शिक्षकों की भर्ती का आधार जेंडर न होकर उनकी विषय विशेष में निपुणता होनी चाहिए। विज्ञान तथा गणित विषयों के शिक्षण के लिए स्त्री एवं पुरुष दोनों के आवेदन स्वीकार किए जाने चाहिए।

साथ-ही-साथ भाषा, संगीत एवं कला जैसे विषयों के शिक्षण के लिए केवल स्त्रियों का चयन न कर इस क्षेत्र में निपुण पुरुष अभ्यर्थियों की भी भर्ती की जानी चाहिए। प्राथमिक विद्यालय स्तर पर शिक्षण के लिए स्त्री एवं पुरुष दोनों अभ्यर्थियों को बिना किसी जेंडर भेद के समान रूप से स्थान दिया जाना चाहिए।


शिक्षकों एवं बच्चों को दी जानेवाली सुविधाएँ


विद्यालयों में शिक्षिका एवं बालिकाओं के लिए शिक्षक एवं बालकों के समान भौतिक एवं आर्थिक सुविधाएँ प्रदान की जानी चाहिए। शिक्षिकाओं एवं बालिकाओं के लिए अलग से प्रसाधन कक्ष की व्यवस्था होनी चाहिए। विद्यालय में खाली समय में आराम करने तथा भीतरी खेलों के लिए महिला स्टाफ रूम तथा छात्रा कक्ष की व्यवस्था होनी चाहिए। पुस्तकालय में बालकों एवं बालिकाओं दोनों के लिए बैठकर पढ़ने की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्त्रीवादी विमर्शों से जुड़ी कहानियों एवं कविताओं के पुस्तक तथा महिला वैज्ञानिकों तथा राजनीतिज्ञों के जीवन वृत्तांत भी उपलब्ध होने चाहिए। शिक्षक एवं बालकों के साथ-साथ शिक्षिका एवं बालिकाओं के लिए भी जिम्नेजियम की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे वे भी शारीरिक तथा मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें तथा समस्त विद्यालय का वातावरण स्वस्थ तथा सक्रिय हो । खेल के मैदान में बालक एवं बालिकाओं दोनों के लिए विभिन्न प्रकार के बाहरी खेलों को खेलने की व्यवस्था होनी चाहिए बालिकाओं तथा बालकों दोनों को बिना किसी लिंग भेद के विभिन्न खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। बालक एवं बालिकाओं दोनों के लिए समान सुविधा वाले अलग-अलग छात्रावास की सुविधा होनी चाहिए, ताकि विद्यालय में दोनों के प्रवेश तथा अवधारणा को समान रूप से बढ़ावा दिया जा सके।

कैंटीन में शिक्षक एवं बालक तथा शिक्षिका एवं बालिकाओं दोनों के लिए स्वास्थ्यवर्धक एवं ताजा खाने की व्यवस्था होनी चाहिए। मध्याहन भोजन में किसी प्रकार का लिंग भेद नहीं होना चाहिए। उनकी आवश्यकता तथा पसंद के अनुसार भोजन की व्यवस्था होनी चाहिए शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं के वेतन में किसी प्रकार का भेद नही होना चाहिए। बालक एवं बालिकाओं दोनों के लिए छात्रवृत्ति की सुविधा होनी चाहिए तथा यह सुविधा उनके मेधा के आधार पर दी जानी चाहिए न कि उनके लिंग के आधार पर। शिक्षक सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिए शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं दोनों को समान रूप से उनके प्रतिभा तथा प्रदर्शन के आधार पर चुना जाना चाहिए।


शिक्षक एवं बच्चों के बीच संबंध :- शिक्षकों एवं बच्चों के बीच सौहार्द्रपूर्ण रिश्ता होना चाहिए । इस रिश्ते का आधार कर्तव्यनिष्ठता, स्नेह तथा विश्वास होना चाहिए न कि किसी जेंडर विशेष के प्रति आसक्ति शिक्षकों को बालिकाओं की आवश्यकता एवं समस्याओं के प्रति सहानुभूति होनी चाहिए तथा उन्हें बालकों के समान विभिन्न विद्यालय गतिविधियों में भागीदारी का अवसर प्रदान करना चाहिए ।

साथ-ही-साथ शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं के बीच भी सौहार्द्रपूर्ण रिश्ता होना चाहिए। दोनों को एक-दूसरे के विचारों एवं भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। इससे विद्यालय में जेंडर समानता के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण होता है।


शिक्षकों की संवेदनशीलता:- किसी भी विद्यालय में जेंडर संवेदनशील पाठ्यचर्या का सफल रूप से संचालन तभी हो सकता है जब वहाँ के शिक्षक भी जेंडर संवेदनशील हो अर्थात वे बिना किसी लिंग भेद के बालिका एवं बालक दोनों के साथ समान रूप से स्नेहपूर्ण व्यवहार करें। शिक्षकों को बालिकाओं की संवेदना एवं अभिव्यक्ति को अपने शिक्षण अभ्यास में व्यापक स्थान देना चाहिए।

उन्हें स्त्रीवादी विमर्शों तथा महिलाओं के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता को पाठ्यवस्तु का अहम हिस्सा बनाना चाहिए तथा उनके द्वारा पाठ्यवस्तु का प्रस्तुतीकरण बालक एवं बालिका दोनों के लिए समान रूप से रोचक तथा स्पष्ट होना चाहिए शिक्षकों को बालक एवं बालिका दोनों की अधिगम आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अधिगम अनुभवों को संगठित करना चाहिए। उन्हें बालक एवं बालिका के बीच संवाद को बढ़ावा देना चाहिए ताकि वे अपने रुढ़िवादी सामाजिक अस्मिता तथा अपने कार्य करने की परिस्थितियों की आलोचना कर सकें। उन्हें कक्षा में जेंडर शून्य भाषा या ऐसी भाषा, जिसमें स्त्री एवं पुरुष दोनों रूप हो, व्यवहार में लाना चाहिए। कक्षा में किसी भी विमर्श को लेकर स्त्री एवं पुरुष दोनों के उदाहरण, सोच या विचार को प्रस्तुत करना चाहिए। उन्हें बालक एवं बालिका दोनों के लिए समान रूप से गहन एवं सकारात्मक प्रतिक्रया देनी चाहिए । यदि किसी बालिका या बालक का कार्य उसे अपने रुढ़िवादी सामाजिक भूमिका के परे किसी गैर रुढ़िवादी भूमिका की ओर ले जाता है तो उसे इस कार्य के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ-ही-साथ उन्हें अपने शिक्षण का जेंडर समानता के दृष्टिकोण से स्व मूल्यांकन भी करना चाहिए।