विद्यालय में मार्गदर्शन एवं परामर्श सेवा (2)- Guidance and Counseling Services in the School
विद्यालय में मार्गदर्शन एवं परामर्श सेवा (2)- Guidance and Counseling Services in the School
1 सामान्य क्रियाएँ
क. विद्यालय के मुख्याध्यापक के साथ मार्गदर्शन एवं परामर्श कार्यक्रम पर विचार-विमर्श करना ।
ख. विद्यालय- संकाय को इससे परिचित कराना।
ग. विद्यालय के मुख्याध्यापक द्वारा विद्यालय मार्गदर्शन समिति बनाना जिसमें कैरियर अध्यापक, शारीरिक शिक्षा अध्यापक और अध्यापक-अभिभावक एसोसिएशन का एक प्रतिनिधि शामिल हो।
2 विशिष्ट क्रियाएँ
क. विद्यार्थियों से सम्बंधित तथ्यों को इकट्ठा करना जैसे पहचान सम्बन्धी सूचनाएँ, घर और परिवार की पृष्ठभूमि सम्बन्धी आँकड़े तथा शैक्षिक उपलब्धियाँ ख. अभिविन्यास कार्यक्रम, जैसे विद्यालय वातावरण, पाठ्यक्रम, विद्यालय में सुविधाओं के बारे में परिचय, नियमित अध्ययन द्वारा आदतों से परिचय तथा सामाजिक समायोजन के बारे में तथा खाली समय के सदुपयोग के बारे में अभिविन्यास ।
ग. नए विद्यार्थियों के अभिभावकों का अभिविन्यास कार्यक्रम, जैसे विद्यालय और विद्यालय मार्गदर्शन कार्यक्रम में माता-पिता की भूमिका के बारे में अभिविन्यास ।
घ. संचित अभिलेख पत्र शुरू करना शांति मैत्री ङ. अल्प-उपलब्धि वाले और विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों की पहचान करना ।
च. बुद्धि परीक्षण की व्यवस्था करना
छ. अधिगम वातावरण में सुधार करना
ज. कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक कार्यक्रमों के आयोजन में सहायता करना ।
झ. परामर्श देना या समस्या को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों के पास भेजना।
III. निम्न सेकेंडरी स्तर (निम्न माध्यमिक स्तर)
इसमें 9वीं और 10वीं कक्षाएँ शामिल होती हैं। इसमें 14 से 16 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों को सम्मिलित किया जाता है। इस स्तर पर विद्यार्थी 10 वर्ष की शिक्षा पूरी कर लेते हैं। इसके पश्चात उनके
लिए तीन रास्ते बचते हैं
i. वे किसी कार्य-शक्ति में प्रवेश लें।
ii. वे किसी व्यावसायिक कोर्स में प्रवेश लें।
iii. वे उच्च-शिक्षा प्राप्त करें ताकि वे किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिल हो सकें।
1. विशिष्ट उद्देश्य
क. विद्यार्थियों को उनकी दुर्बलताओं और शक्तियों को समझने के योग्य बनाना ।
ख. शैक्षिक और व्यावसायिक अवसरों और आवश्यकताओं के बारे में सूचना इकट्ठी करने के योग्य बनाना ।
ग. विद्यार्थियों को शैक्षिक और व्यावसायिक चयन करने में सहायता देना
घ. विद्यार्थियों को उनकी समस्याओं के समाधान में सहायता करना। इन समस्याओं में विद्यालय और घर में व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन की समस्याएँ भी शामिल हैं।
ङ. व्यावसायिक सूचनाओं के अवसर प्रदान करना।
च. विद्यार्थियों को संचित अभिलेखों, परीक्षण परिणामों आदि से उनके बारे में उन्हीं को सूचनाएँ उपलब्ध कराना ।
छ. विद्यार्थी में स्वयं प्रत्यय विकसित करना।
2. विशिष्ट क्रियाएँ
क. योग्यताओं, अभिरूचियों, रूचियों, उपलब्धियों और अन्य मनोवैज्ञानिक चरों के बारे में आँकड़े एकत्रित करना
ख. कार्यों से परिचित कराना।
ग. क्षेत्र भ्रमणों का आयोजन करना।
घ. कैरियर कांफ्रेंस और कैरियर प्रदर्शनी का आयोजन ।
ङ. कोर्स का चयन करने में सहायता करना।
च. अल्प-उपलब्धि और विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों की पहचान करना।
छ. माता-पिता को मार्गदर्शन प्रदान करना।
ज. समस्या को देखते हुए विशेषज्ञों और परामर्शदाता के पास भेजना।
IV. सीनियर सेकेंडरी स्तर ( उच्च प्राथमिक स्तर)
इस स्तर में 11वीं और 12वीं कक्षाएँ सम्मिलित हैं और इस स्तर में 16+ से 18+ वर्ष का आयुवर्ग शामिल होता है।
1. विशिष्ट उद्देश्य
क. निम्न सेकेंडरी स्तर के आधार पर प्राप्त सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को उनके कोर्स के चयन में सहायता करना।
ख. उनकी शैक्षिक रूचियों के सन्दर्भ में उनके कैरियर के चयन में सहायता करना।
ग. व्यक्तिगत सामाजिक समायोजन के क्षेत्र में सहायता करना। इन विशिष्ट उद्देश्यों के अतिरिक्त निम्न सेकेंडरी स्तर के विशिष्ट उद्देश्य भी उच्च सेकेंडरी स्तर में शामिल किये जाते हैं।
2. विशिष्ट क्रियाएँ
क. सूची सेवा व्यक्तिगत संचित अभिलेख पत्र रखना जारी रहता है। विद्यार्थी के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों के बारे में सूचनाएँ एकत्रित करने के लिए विभिन्न परीक्षणों तथा विधियों का प्रयोग किया जा सकता है।
ख. व्यावसायिक सूचना सेवा इस स्तर पर स्थानीय व्यावसायिक अवसरों और स्वयं-रोज़गार अवसरों के बारे में सूचनाएँ प्रदान करने पर अधिक बल दिया जाता है। इस उद्देश्य के लिए कैरियर कांफ्रेंस, क्षेत्रीय यात्राएँ, कैरियर वार्ताएँ आदि की व्यवस्था की जाती है। स्थानीय रोज़गार अवसरों के बारे में सूचनाएँ इकट्ठी करने के लिए निर्देशन- कार्यकर्ता को रोज़गार कार्यालय से मिलकर कार्य करना होता है और इसी प्रकार क्षेत्र के विभिन्न उद्योगों से मेल जोल रखना जरूरी होता है। इस स्तर पर विद्यार्थी को उसकी रूचि के व्यवसाय के विस्तृत अध्ययन में भी सहायता देने के प्रयास किये जाते हैं।
ग. परामर्श-सेवा- व्यक्तिगत, सामाजिक और शैक्षिक व्यावसायिक समस्याओं के समाधान के लिए विद्यार्थियों को परामर्श-सेवा उपलब्ध कराई जाए। यदि प्रशिक्षित व्यक्ति उपलब्ध नहीं हैं तो विद्यार्थियों को अन्य अभिकरणों के पास भेज देना चाहिए। परामर्शदाता विभिन्न मार्गदर्शन सेवाओं के द्वारा विद्यार्थियों की, सही कोर्स और कैरियर चुनने में तथा एक वयस्क की भूमिका निभाने की तैयारी में सहायता करता है।
वार्तालाप में शामिल हों