शिक्षा में जन संचार के द्वारा संप्रेषण के माध्यम (2)- Media of communication through mass communication in education
शिक्षा में जन संचार के द्वारा संप्रेषण के माध्यम (2)- Media of communication through mass communication in education
टेलीविजन या दूरदर्शन - आधुनिक युग में दूरदर्शन संचार क्रिया का एक शक्तिशाली साधन है। दूरदर्शन के द्वारा प्रत्येक घटना देखी जा सकती है तथा हर घटना का विवरण सुना जा सकता है। इसमें प्रत्येक घटना को रिकार्ड करने की, फिर उसके प्रसारण की व्यवस्था होती है।
वेबकास्ट- आज इन्टरनेट के द्वारा कई टेलीविज़न या रेडियो कार्यक्रमों या अन्य ऑडियो तथा विडियो कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। ऐसे प्रसारण को वेबकास्ट के नाम से जाना जाता है।
वीडियो टैक्स : यह संप्रेषण की एक नवीन विधि है जो दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण अधिगम को प्रभावित करती है। वीडियो टैक्स एक ऐसी अमुद्रित माध्यम की प्रणाली है,
जिसके द्वारा पारस्परिक सूचनाओं के आदान-प्रदान में प्रयोग किया जाता है। वीडियो टैक्स में घरेलू टेलीविजन एक कम्प्यूटर की तरह कार्य करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके द्वारा आँकड़ों पर आधारित सूचनायें एकत्रित की जा सकती है। इसके लिए वीडियो टैक्स में एक रिकार्डर, टेलीफोन, टेलीविजन तथा की-बोर्ड का प्रयोग किया जाता है। यह रेडियो और टी.वी. से अच्छा है, क्योंकि इसमें समय सारणी का कोई बंधन नहीं है। द्वितीय भाषा की शिक्षा में इसका सफल प्रयोग किया जा सकता है। यह कम्प्यूटर पर आधारित अनुदेशनों को भी प्रयोग करने में समर्थ है। इस प्रणाली में शिक्षक और छात्र दोनों के मध्य अन्तः क्रिया सम्भव है। इसमें तुरन्त पृष्ठपोषण के अवसर भी मिलते हैं। यह जन साधारण के लिए सामान्य सूचना प्राप्त करने तथा छात्रों के लिये विशिष्ट सूचना प्राप्त करने में सक्षम तथा समर्थ प्रणाली है। दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों के अंतर्गत स्थापित अध्ययन केन्द्रों की समस्त अध्ययन सामग्री तथा अन्य सुविधायें वीडियो टैक्स घर बैठे ही उपलब्ध करा देता है। छात्र वीडियो टैक्स के माध्यम से संस्थाओं को सूचनाएँ प्रेषित कर सकता है, विभिन्न पुस्तकालयों से पुस्तकें प्राप्त कर सकता है तथा आवश्यकतानुसार विभिन्न विषयों के बारे में सुझाव माँगा जा सकता है। वीडियो टैक्स में दृश्य सामग्री की सुविधा तो होती है, परन्तु श्रव्य माध्यम की सुविधा नहीं है। आजकल इसे बहु माध्यमों वाली प्रणाली के रूप में विकसित करने के अनेक प्रयोग तथा शोध हो रहे हैं जिससे वीडियो टैक्स श्रव्य-दृश्य माध्यम के रूप में एक शक्तिशाली शिक्षा का साधन बन सकता है।
टेलीकांफ्रेंसिंग
टेलीकांफ्रेंसिंग या टेलीकांफ्रेंस में दूर-दूर बैठे हुए दो या दो से अधिक लोगों के मध्य वास्तविक समय अन्तः क्रिया होती है। दूसरे शब्दों में टेलीकांफ्रेंसिंग एक ऐसी इलेक्ट्रानिक प्रणाली है जिसमें दो या दो से अधिक दूर बैठे व्यक्ति अपने इच्छित विषय-वस्तु से संबंधित चर्चा, परिचर्चा में भाग ले सकते हैं, अपनी बात कह सकते हैं, दूसरों की बात सुन सकते हैं, और उन पर तुरन्त प्रतिक्रियाएँसुझाव या अभिमत प्राप्त कर सकते हैं एवं आवश्यक सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं। टेलीकांफ्रेंसिंग के लिये एक से अधिक टेलीफोन लाईनों की जरूरत पड़ती है अथवा पारस्परिक संबंधित युक्तियों की आवश्यकता होती है, जिसको सम्पर्क विधि कहा जाता है। प्रत्येक युक्ति को सम्पर्क द्वारा जोड़ना सामान्य अभ्यास माना जाता है। सम्पर्क के लिए हाथों के सैट, शीर्ष सेट, स्पीकर फोन, रेडियो, टेलीफोन आदि की जरूरत पड़ती है।
समाचार-पत्र : समाचार पत्र जन संप्रेषण का एक शक्तिशाली साधन है। अधिकतर शिक्षित व्यक्ति समाचार-पत्र पढ़ते हैं। ये रेडियो अथवा टेलीविजन पर समाचार सुनने के पश्चात् भी समाचार-पत्र पढ़ते हैं,
क्योंकि समाचार-पत्रों में प्रत्येक समाचार का विस्तृत विवरण दिया रहता है। एक अच्छा समाचार-पत्र देश में घटित होने वाली खबरों का सही, सटीक तथा संतुलित विवरण प्रस्तुत करता है। समाचार-पत्रों में विभिन्न पक्षों जैसे- शिक्षा, दर्शन, राजनीति, समाजशास्त्र, विज्ञान, इतिहास, भूगोल आदि विभिन्न विषयों पर भी सामग्री मिलती है। समाचार-पत्रों में समाचारों के अतिरिक्त विभिन्न मुद्दों पर लेख तथा कथायें आदि भी प्रकाशित होती है। इस प्रकार, समाचार-पत्रों के माध्यम से व्यक्तियों को नवीन ज्ञान प्राप्त होता है, उसे अपने क्षेत्र में नवीनतम सूचनाएं प्राप्त होती हैं, स्थानीय, प्रांतीय, राष्ट्रीय तथा विश्व स्तर की विभिन्न घटनाओं तथा व्यक्तियों आदि के विषय में जानकारी मिलती है तथा समाचार-पत्र के माध्यम से शिक्षा दी जाती है।
जर्नल या शोध-पत्रिकाएँ: जर्नल विभिन्न संस्थानों तथा एसोसिएशनों द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिकायें होती हैं, जिनमें विषयविशेष पर नवीनतम शैक्षिक प्रपत्र तथा शोध प्रपत्र प्रकाशित किए जाते हैं इनका अध्ययन करके व्यक्ति अपने विषय में नवनीतम घटनाओं, आविष्कारों, सिद्धान्तों, खोजों तथा प्रयोगों के बारे में विस्तृत विवरण प्राप्त करता है। शिक्षा के क्षेत्र में अनेक जर्नल निकलते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक मेल - आधुनिकीकरण के परिणामस्वरूप दूरसंचार सूचना क्रांति, आकाशवाणी, दूरदर्शन, टेलीफोन, तार, पेजिंग, सेलुलर मोबाइल, फैक्स आदि मार्गो से गुजरती हुई उच्च तकनीकी युग में प्रवेश कर गयी है । इस प्रणाली में संसार के लाखों कंप्यूटर करोड़ो लोगों के विचार व एकत्र की गयी सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं
ई-अधिगम- शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिकतम विद्युतीय उपकरणों के प्रयोग द्वारा छात्रों के में परिवर्तन लाना ही ई-अधिगम है ।
अर्नेट सेवा - इसका अर्थ हैं 'एजुकेशन एंड रिसर्च नेटवर्क' । भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक विभाग ने संयुक्त राष्ट्र विकास की सहायता से इसे तैयार किया है। हमारे देश के कई कार्पोरेट कम्पनियाँ तथा शैक्षिक संस्थान इसका लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
यूसनेट- यह सामूहिक चर्चा के लिए है । इस समय दुनिया में 5000 से अधिक समाचार समूह हैं जो अलग-अलग भाषाओँ में विभिन्न विषयों की जानकारी देते हैं ।
टेलनेट - इस प्रणाली में विशाल डाटाबेस की सहायता से हम नई खोज कर सकते हैं। इस प्रणाली के तहत एक कंप्यूटर से काफी दूरी के कंप्यूटर तक लॉग इन होकर उस कंप्यूटर के की बोर्ड को आसानी से देख सकते हैं ।
टेली टीचिंग एंड टेली कान्फ्रेंसिंग- इस तकनीकी का प्रयोग क्षेत्रीय सीमायों के पार विद्यार्थी शिक्षक तथा शैक्षिक संस्थानों को आपस में जोड़ने के लिए होता हैं। दूस्थ अध्ययन परीक्षण में विडियो टेली टीचिंग, विडियो कान्फ्रेंसिंग, केबल सिमुलेटेड विडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा दूरस्थ अध्ययन तकनीक के अभ्यास क्रम के लिए इन्टरनेट का उपयोग सम्मलित है ।
इलेक्ट्रॉनिक पत्र पत्रिकाएँ- डिजिटल प्रिंटिंग प्रोद्योगिकी के द्वारा अब इलेक्ट्रॉनिक पत्र पत्रिकाएँ डिजिटल कम्पाइलर में उपलब्ध हैं। इन्टरनेट पर देश विदेश की पत्र पत्रिकाएँ वेब साईट पर उपलब्ध है जो कि संप्रेषण का एक सशक्त माध्यम है।
इस प्रकार, हम शिक्षा में नवीन संचार साधनों का अधिकतम उपयोग कर संप्रेषण को प्रभावी बना सकते हैं।
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